जयपुर,
15 नवम्बर। राजस्थान में विशाल शासन तंत्र की धुरी के
रूप में हमारे कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने पहली
बार कर्मचारी कल्याण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाये। अनेक राहतों,
पदोन्नति
का तोहफा सहित बड़े निर्णर्यों से कर्मचारी जगत में संतुष्टि का भाव नजर आता है।
राज्य
कर्मचारी की संतान को विशेष योग्यजन होने की स्थिति में पहली बार आजीवन पारिवारिक
पेंशन की पात्रता दी गई। साथ ही विधवा या परित्यक्ता पुत्री को पारिवारिक पेंशन
हेतु अधिकतम 9 वर्ष
की आयु की सीमा को समाप्त किया गया।
राज्य
कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान दुर्घटना,
जान
बूझ कर पहुंचायी गयी चोट, पब्लिक
वाँयलेंस, चुनाव
एवं मत गणना में ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 20 लाख
रुपये एक्स-ग्रसिया के रूप में देने का प्रावधान किया गया। सेवा निवृत राज्य
कर्मचारियों को विशेष राहत प्रदान करते हुए उनकी मेडीकल डायरी के नवीनीकरण की
आवश्यकता को समाप्त किया गया।
राज्य
में 50 वर्ष
की अधिक आयु के राजकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वर्ष में एक बार राजकीय
अस्पतालों में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी गई। महिला कर्मचारियों को बड़ी
राहत देते हुए एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर 180 दिन का
प्रसूति अवकाश दिया जा रहा है।
राज्य
सरकार ने वर्षों से लम्बित विभागीय पदोन्नति देने के महत्वपूर्ण निर्णय से 80 हजार
कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला। राज्य में 10 हजार 321 व्यक्तियों
को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई। केन्द्रीय छटें वेतन आयोग की सिफारिशों के
आधार पर राज्य कर्मचारियों को संशोधित वेतन मान 1 जनवरी,
2006 के स्थान पर 1 जनवरी,
2006 से स्वीकृत किए गए। राज्य में कर्मचारी की पूर्ण
पेंशन हेतु 33 वर्ष
की सेवा अवधि को 28 वर्ष
किया गया तथा सेवा अवधि में प्रतिवर्ष 15 दिवस
के समर्पित अवकाश का नकद अवकाश भुगतान करने की सुवधिा पहली बार प्रदान की गई।
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