Thursday, November 14, 2013

राजस्थान : महिलाओं एवं बच्चों के विकास में आगे

जयपुर, 14 नवम्बर। राजस्थान में महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में सुनियोजित कार्यों तथा योजनाओं के माध्यम से अनुकरणीय कार्य हुए हैं जिन्हें देशभर में प्रशंसा मिली। मां और बच्चे के स्वास्थ्य से लेकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने की अभिनव पहल की वजह से ही आज इनके चेहरे खिले हुए है।
प्रदेश में पहली बार सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 2.86 लाख विधवा, परित्यक्ता, एकल नारी पेंशन में सरलीकरण की वहज से ही लाभान्वित हुई। महिलाओं को राज्य में रोड़वेज की सभी श्रेणी की बसों के किराये में 30 प्रतिशत की छूट दी गई।
राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा योजना की शानदार क्रियान्वित के परिणाम स्वरूप 24.5 लाख से ज्यादा महिलाएं एवं 4.73 लाख नवजात शिशु लाभान्वित हुए। प्रदेश में बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शुभ लक्ष्मी योजना के तहत कन्या जन्म से लेकर उसकी पांच वर्ष की आयु होने तक कुल 7 हजार 300 रुपये का नकद सहयोग दिया जा रहा है।
पुलिस महकमें में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 30 प्रतिशत एवं नगर निकायों में निर्वाचित पदों पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किये गये। महिलाओं को सूचना क्रांति से जोड़ने के लिए आर.के.सी.एल. के माध्यम से कम्प्यूटर की बेसिक शिक्षा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री सम्बल योजना के तहत विधवा/परित्यक्ता महिलाओं के लिए बी.एड/बी.एस.टी.सी. पाठ्यक्रम निःशुल्क करवाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये के अंशदान से आंगनबाड़ी कल्याण कोष स्थापित किया गया।
अनुसूचित जाति उपयोजना क्षेत्र में प्रथम बार स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए 348 प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। राज्य में बाल कल्याण व बाल संरक्षण के उद्देश्य से पहली बार बाल अधिकार संरक्षण आयोगका गठन किया जा चुका है। बालकों के अधिकारों के संरक्षण एवं उनकी सुरक्षा के उद्देश्य से पृथक से एक बाल निदेशालय स्थापित किया। महिला सशक्तीकरण के लिए राजकीय उपक्रमों के निदेशक मण्डलों में एक तिहाई महिलाओं का मनोनयन किए जाने का निर्णय लिया गया। सभी जिला मुख्यालयों पर महिला थानों में महिला एवं सलाह केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं।
रक्षाबंधन एवं महिला दिवस (8 मार्च) पर सभी महिलाओं को रोडवेज में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाती है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित सामग्री को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जा रही है। 47 हजार 416 बीपीएल महिलाओं को पुत्रियों के विवाह हेतु 49.22 करोड़ रुपये की अनुदान राशि दिया गया।  स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के प्रशिक्षण हेतु प्रत्येक जिले के एक-एक ब्लॉक में धनलक्ष्मी समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जा रही है।
9 हजार 232 आंगनबाड़ी केन्द्रों को पहली बार विद्यालयों में स्थानान्तरित किये गये है। कलेवा योजना के अन्तर्गत प्रसूता महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्र पर गर्म भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। महिला उद्यमियों के लिए समय से ऋण चुकाने पर ब्याज दर में एक प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है।
महिलाओं के सशक्तीकरण तथा उनको शोषण एवं उत्पीड़न से बचाने व संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा जनू, 2012 से महिला हेल्पलाइन नम्बर 18001806781 चालू की जा चुकी है। सामूहिक विवाह योजना में वधू को देय 4 हजार 500 रुपये को बढ़ाकर 10 हजार रुपये एवं आयोजकों के देय 1500 रुपये से बढ़ाकर 2000 प्रति जोड़ा किया गया है।

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