जयपुर,
13 नवम्बर। राजस्थान में खेलों के विकास के लिए विगत पांच वर्षों में अनेक
महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये जिससे खिलाड़ियों को नई ऊर्जा मिली तथा उनका जीत का
संकल्प और अधिक दृढ़ हुआ। खेल नीति के माध्यम से खेलों और खिलाड़ियों का सर्वांगीण
विकास का लक्ष्य धीरे-धीरे मूर्त रूप ले रहा है। आज राजस्थान के खिलाड़ी एथेलेटिक्स,
निशानेबाजी,
बास्केटबॉल
सहित अनेक खेलों में राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय खेल
प्रतिस्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री
अशोक गहलोत की पहल पर ही राज्य में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक
जीतने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में 10 गुणा
वृद्धि हुई है। इससे खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा है तथा वे दृढ़ संकल्प के साथ खेल
प्रतिस्पर्धाओं में पदक जीतने की होड़ में निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं।
राज्य
की खेल नीति, 2013 लागू की गई। इसका उद्देश्य खेलों के सर्वांगीण
विकास तथा खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाओं और मैदान उपलब्ध करवाना है ताकि हमारे
खिलाड़ी देश में किसी से पीछे नहीं रहें। खेलों का सुनियोजित विकास करने की दिशा
में इस खेल नीति से नये आयाम स्थापित होंगे।
राज्य
में महिला खिलाड़ियों को समुचित प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पटियाला की राष्ट्रीय
खेल संस्था से डिप्लोमा करने के लिए 40 हजार
रुपये के स्टाइपंड की व्यवस्था की गई है। जिससे हमारी महिलाएं बेहतर खिलाड़ी के
साथ-साथ अच्छी प्रशिक्षक भी बन सके।
विशेष
योग्यजन खिलाड़ियों को भी सामान्य खिलाड़ियों की तरह प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
जिससे ये खेलों के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास कर एक खिलाड़ी के रूप में
बेहतर प्रदर्शन कर सके। प्रदेश में जनजाति के खिलाड़ियों को परम्परागत तीरंदाजी खेल
में विशेष प्रशिक्षण देने के लिए उदयपुर के महाराणा प्रताप खेल गांव,
चित्रकूट
नगर में ‘तीरंदाजी खेल एकेडमी’
की
स्थापना की गई है।
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