जयपुर,
29 अक्टूबर। राज्य में विगत चार वर्षों से इन्द्र देव की मेहरबानी से खेतों
में हरियाली रही है। राज्य सरकार ने भी प्रदेश के किसानों के कल्याण में कोई कोर
कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की पहल से न केवल किसानों अपितु
पशुओं और पशुपालकों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अभिनव योजनाएं
क्रियान्वित की गई।
आज
राजस्थान के किसानों ने कठिन भागौलिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और राज्य
सरकार के सहयोग से सफलता के नए आयान स्थापित करते हुए दो बार राष्ट्रीय स्तर पर
राज्य को पुरस्कृत होने का गौरव दिलवाया। राजस्थान को वर्ष 2010-11
में
पहली बार दलहनी फसलों के 32.32 लाख टन
अधिकतम उत्पादन के फल स्वरूप प्रधानमंत्री द्वारा ‘‘कृषि
कर्मण पुरस्कार’’ प्रदान किया गया जिसके तहत राज्य को एक करोड़ रुपये
का नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र दिया गया। इसी प्रकार राजय में खाद्यान्न
उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए वर्ष 2011-12
में भी
‘‘कृषि कर्मण पुरस्कार’’
के
अन्तर्गत कमेन्डेशन अवार्ड से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने इन दोनों पुरस्कारों का
श्रेय राज्य के किसानों को दिया।
राज्य
सरकार ने मुख्यमंत्री ब्याज मुक्त फसली ऋण योजना के प्रथम वर्ष में 26.53
लाख
कृषक समय पर ऋण चुकाकर ब्याज भार से मुक्त हुए। इस वर्ष 33.73
लाख
किसानों ने ऋण प्राप्त किया। राज्य में 12.68 लाख
मैट्रिक टन गेहूं की खरीद पर 150 रुपये
प्रति क्विटंल की दर से किसानोंं को 190.24 करोड़
रुपये का अतिरिक्त बोनस का सीधे की भुगतान किया गया।
किसानों
के लिए गत साढ़े वर्ष की अवधि में 13 हजार 234
करोड़
रुपये लागत की अतिरिक्त बिजली खरीद कर आपूर्ति सुनिश्चित की गई। वहीं बढ़ी हुई
बिजली दरों का भार राज्य सरकार ने वहन किया ताकि हमारे किसानों को बिजली को लेकर
आर्थिक भार सहन नहीं करना पड़े।
राज्य
में किसानों की बेहबूदी के लिए किसान आयोग गठित किया गया। आजादी के बाद पहली बार
राज्य में 53 लाख पात्र कृषकों को 857
करोड़
रुपये की इनपुट सबसिडी उपलब्ध करवाई गई। राज्य में पाला,
शीत
लहर को अब राहत के दायरे में शामिल कर लिया गया है। प्रदेश में डिग्गी निर्माण पर 3
लाख की
सबसिडी उपलब्ध करवाई गई जिसके परिणाम स्वरूप 14 हजार 830
डिग्गीयों
का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।
राज्य
में 5 हजार 689 सौर
ऊर्जा पम्प सेटों की स्थापना में 86 प्रतिशत
अनुदान किया गया। ड्रिप सिचांई पर 90 प्रतिशत
अनुदान देकर लाखों किसानों को लाभान्वित किया गया। इसके साथ ही किसानों को 2.94
लाख नए
कृषि कनेक्शन जारी किये गये।
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