जयपुर 28,
अक्टूबर।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने राजस्व अर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले
व्यापारिक वर्ग को समुचित प्रोत्साहन दिया। राज्य सरकार ने समय-समय पर अनेक ऎसे
महत्वपूर्ण निर्णय तथा फैसले किए जिनसे व्यवसाय की राह में आ रही बाधाएं दूर हुईं।
प्रदेश में ईमानदारी से कारोबार कर रहे व्यापारियों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति
देने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए। इसी का नतीजा है कि आज प्रदेश में व्यापार
फल-फूल रहा है तथा व्यापारी वर्ग खुशहाल हुआ है। व्यापारियों को प्रोत्साहन देने
के साथ ही राज्य सरकार ने शुद्ध के लिए युद्ध के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास
किया कि उपभोक्ताओं तक शुद्ध खाद्य सामग्री पहुंचे।
राजस्व
अर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करने के उद्देश्य से विभिन्न श्रेणियों में
सर्वाधिक कर जमा कराने वाले व्यापारियों के लिए ‘व्यवहारी
सम्मान योजना‘ लागू की गई। कर निर्धारण के लिए कार्यालयों में
नहीं आना पड़े तथा समय की बचत हो, इसके
लिए डीम्ड कर निर्धारण व्यवस्था लागू की गई। व्यवहारियों ने इसे सराहा है।
राज्य
में व्यापार के लिए निर्बाध एवं सुचारू आवागमन के लिए 8
जुलाई,
2009 से वाणिज्यिक कर विभाग के समस्त उड़नदस्तों को समाप्त किया गया। केन्द्रीय
बिक्री कर से संबंधित समस्त घोषणापत्र एवं निर्यातकों की सुविधा के लिए वैट-15
को
ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की गई। इनपुट टैक्स क्रेडिट सत्यापन के लिए
वाणिज्यिक कर विभाग में क्लीयरिंग हाउस की व्यवस्था एवं सरलीकरण किया गया।
वाणिज्यिक
कर विभाग में अपील स्तर पर स्थगन आवेदन का एक माह में निर्णय नहीं होने पर मांग
राशि स्वतः स्थगित करने की व्यवस्था लागू की गई। इसके साथ ही प्रथम अपील का निर्णय
एक वर्ष की अवधि में अनिवार्य किया गया। कम्पोजिशन योजना के लिए लागू अधिकतम टर्न
ओवर की सीमा को 50 लाख
रूपये से बढ़ाकर 75 लाख
रूपये किया गया। वाणिज्य कर प्रणाली में व्यापक सुधार कर सूचना प्रौद्योगिकी
आधारित कर प्रशासन, ई-रजिस्ट्रेशन,
ई-विवरणी,
ई-पेमेन्ट
में राजस्थान आज देश का अग्रणी राज्य बन गया है। इतना ही नहीं गेहूं,
चावल,
दाल,
धान,
गेहूं
का आटा, गेहूं का फोर्टिफाइड आटा,
चोकर,
मैदा,
सूजी,
साबुत
जीरा, सौंफ, हल्दी,
सूखी
मिर्च, धनिया, मैथी,
अजवायन
एवं सभी प्रकार के केरासीन को वैट से पूर्ण रूप से मुक्त करने का लाभ उपभोक्ताओं
के साथ-साथ व्यापारियों को भी समान रूप से मिला।
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