जयपुर,
26 अक्टूबर। राज्य सरकार ने आधी आबादी के सम्मान को
बनाये रखने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये,
जिससे
मातृ शक्ति का सम्मान बढ़ा है। आज प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं से लेकर राज्य
विधानसभा एवं लोकसभा तक प्रदेश की महिलाएं अपनी क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ उपयोग
करते हुए विकास में बराबर की भागीदारी निभा रही है। प्रदेश की महिलाएं पंच-सरपंच,
सभापति-मेयर,
विधायक,
सांसद
तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार में मंत्री के रूप में राजस्थान की विशिष्ट पहचान बना
रही है।
मुख्यमंत्री
अशोक गहलोत ने आधी आबादी को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने तथा उनकी बराबरी की
हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया जिससे प्रदेश
की महिलाएं आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भर भी बन सके।
राज्य
सरकार ने महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएं बनाई। राज्य में महिलाओं को
राजस्थान रोडवेज की सभी श्रेणी की बसों के किराये में 30 प्रतिशत
की छूट दी जा रही है। मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना के सरलीकरण से अब
तक 2.86 लाख नई पेंशन स्वीकृत हो चुकी है।
राजस्थान
जननी-शिशु सुरक्षा योजना के तहत 24.5 लाख
महिलाओं एवं 4.73 लाख
नवजात शिशुओं को लाभान्वित किया गया है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर इस योजना से
मातृ एवं शिशु की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित हुआ। पुलिस में 30 प्रतिशत
एवं नगर निकायों में निर्वाचित पदों पर महिलाओं के लिए 50
प्रतिशत आरक्षित दिया गया। राज्य में आर.के.सी.एल. के माध्यम से महिलाओं के लिए
कम्प्यूटर की बैसिक शिक्षा निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है।
राज्य
सरकार ने पहल कर 100 करोड़
के अंशदान से आंगनबाड़ी कल्याण कोष की स्थापना की। महिला स्वयं सहायता समूहों
द्वारा निर्मित सामग्री को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी गई,
जिससे
महिला समूहों की रचनात्मक गतिशीलता में वृद्धि सुनिश्चित हुई तथा उनके द्वारा
बनाये गये उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहन भी मिला।
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