जयपुर, 23 अक्टूबर। राजस्थान देश का पहला ऎसा प्रमुख राज्य है, जहां आमजन को सुनवाई का अधिकार देने की पहल की गई।
आम आदमी को एक निश्चित समय में पारदर्शिता के साथ लोकसेवाओं का लाभ दिलाने के
उद्देश्य से ही राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान के गारंटी अधिनियम-2011
आहत को राहत देने का महत्वपूर्ण कानून बना।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन देने के संकल्प की वजह
से ही आज आम आदमी को सरकारी दफ्तरों में अपने काम के लिए गाहे-बगाहे चक्कर लगाने
की मशक्कत से निजात मिली है। राज्य में लोक सेवाओं की गारंटी देने के लिए बनाये
गये गारंटी अधिनियम के माध्यम से प्रदेश में आम जनता से जुड़े 18
विभागों की 153 सेवाओं को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत उपलब्ध करवाने
के लिए 14 नवम्बर,
2011 से अब तक 2.13 करोड़ से अधिक प्रकरणों में समयबद्ध सेवाएं प्रदान
की गई है। इस अधिनियम को संस्थानिक बल देने के उद्देश्य से ही अलग से लोक सेवा
निदेशालय की स्थापना की जा चुकी है।
राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2011
को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा
सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 लाया गया। देश में पहली बार सम्मान एवं अधिकार से
गरीब को सुनवाई का अधिकार देने के लिए प्रशासन में पारदर्शिता लाने और आम जन को
समस्या का समाधान शीघ्र प्रदान करने के उद्देश्य से ही यह अधिकार दिया गया। इसके
तहत पंजीकृत प्रार्थना पत्र की सुनवाई 15 दिन में करने की अनिवार्यता तथा 7 दिनों में परिणामों की लिखित सूचना देने का
प्रावधान किया गया है। सलाह केन्द्र एवं अपील का प्रावधान इस अधिनियम की प्रमुख
विशेषताओं में शामिल है।
प्रदेश में 1 अगस्त, 2012 से लागू सुनवाई का अधिकार अधिनियम के तहत अब तक 1.32
लाख प्रकरण दर्ज हुए हैं जिनमें से 1.27
लाख प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है।
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