जयपुर, 22 अक्टूबर।
प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर जननी व शिशु की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य
सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई ‘‘राजस्थान जननी-शिशु सुरक्षा योजना’’ के अन्तर्गत अब तक 24.5 लाख महिलाएं और 4.73 लाख नवजात शिशु लाभान्वित हुए हैं, वहीं राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आने के
बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने सदैव चिकित्सा एवं
स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी है। उन्हीं की पहल पर राज्य में 12 सितम्बर, 2011 से इस
योजना का शुभारम्भ हुआ जो आज सफलतापूर्वक मूर्त रूप लिये हुए हैं।
इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों एवं चिकित्सा संस्थानों
में सभी प्रसूताओं एवं नवजात शिशुओं को आवश्यकता होने पर सभी प्रकार की निःशुल्क
सेवाएं व परिवहन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे संस्थागत प्रसव 71 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत हो गया है। योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र की
महिलाओं को 1400
रुपये एवं शहरी क्षेत्र की
महिलाओं को एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा रहा है।
जननी-शिशु सुरक्षा योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं के
लिए संस्थागत प्रसव, आवश्यकतानुसार सीजेरियन
ऑपरेशन द्वारा प्रसव, दवाइयां एवं अन्य आवश्यक
सामग्री, जांच सुविधाएं, भोजन, रक्त सुविधा, रैफरल ट्रांसपोर्ट एवं यूजर चार्जेज से छूट का लाभ सहित सभी
सुविधाएं निःशुल्क मिलने से प्रसूताओं को व्यापक स्तर पर प्रदेश भर में बड़ी राहत मिल रही है। इसी प्रकार 30 दिवस तक की उम्र के बीमार नवजात शिशुओं को निःशुल्क
सुविधाएं दी जा रही हैं।
राजस्थान जननी-शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत 104 जननी एक्सप्रेस सेवा आरम्भ की गई है, जिसके अंतर्गत 400 वाहनों के द्वारा प्रसूताओं को घर से अस्पताल लाने-ले-जाने
के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसमें 200 नई जननी एक्सप्रेस शामिल की जा रही है।
मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना के प्रारम्भ होने से अब तक 1 लाख 63 हजार 278 लाभार्थियों को 34.28 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किये गये हैं।
इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव से बालिका का जन्म होने पर 2100 रुपये तथा एक वर्ष की आयु व टीकाकरण पूर्ण होने पर 2100 रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाती है। बालिका की 5 वर्ष आयु होने व स्कूल में प्रवेश लेने पर 3100 रुपये की अतिरिक्त राशि देय होती है।
योजना के सुखद परिणामों को देखते हुए मातृ एवं शिशु मृत्यु
दर में कमी के संकेत नजर आने लगे हैं और प्रसूताओं को प्रसव संबंधी जटिलताओं से
छुटकारा मिलने के साथ ही नवजात शिशुओं की उचित चिकित्सा से उन्हें एक नया जीवन मिल
रहा है।
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