मैथ्यू
मॉनिटरिंग करें कि लोगों तक गेहूं पहुंचे, पेंशन
मिले,
दवाइयां
मिले तो इसमें क्या बुराई
जयपुर, 17 अक्टूबर। मुख्यमंत्री
श्री अशोक गहलोत ने कहा है कि अगर मुख्य सचिव मॉनिटरिंग करें कि गेहूं पहुंचना चाहिए, पेंशन मिलनी चाहिए, दवाइयों की सप्लाई निरन्तर बनी रहें, तो इसमें क्या बुराई है। ऎसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी पर बौखलाहट के अंदर बेतुके
और तथ्यहीन आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री मैथ्यू, जिनकी 36 साल की नौकरी हो, कई सरकारें आई, कई सरकारें गई, हर सरकार के समय चाहे किसी पार्टी की सरकार रही हो, उसकी पॉलिसी, प्रोग्राम एवं कार्यक्रम को उन्होंने क्रियान्वित करने का काम किया होगा। आज
तक उन पर कभी आरोप नहीं लगा होगा। ऎसे व्यक्ति पर आरोप लगाकर उसे डिमोरलाइज करना चाहे
तो हर व्यक्ति का स्वाभिमान होता है तो मेरी समझ में यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे द्वारा इस प्रकार के बयान
सोच समझकर, घबराकर जारी करवाये जा रहे हैं, क्योंकि जो स्कीमें लागू होगी, उससे गुड गवर्नेन्स दिखेगी, वह दिखनी नहीं चाहिए। मैं ऎसे प्रयासों की निंदा करता हूं। इस प्रकार की हरकतें
पहले कभी नहीं होती थी। कई मुख्यमंत्री आये, कई मुख्यमंत्री गए, कई सरकारें बदली भी है मगर राजस्थान में ऎसी परम्परा कभी नहीं रही। पिछली सरकार
जब से बनी तब से नई-नई परम्पराएं डाली जा रही है।
वह परम्परा क्या है। आपको मालूम है एट पीएम नो सीएम। मुख्यमंत्री ने करोड़ों
के कीमती कारपेट चोरी जाने का भी जिक्र किया और कहा कि वे कारपेट इरानी कारपेट थे, एन्टीक थे, कारपेट कहां है, लंदन में है या देश के अंदर या प्रदेश के अंदर, किसी को पता नहीं है इन कारपेटों के बारे में। उनके पास कोई जवाब नहीं है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी, राजस्थान के कर्मचारी सब जानते हैं कि श्री मैथ्यू के निष्पक्षता से काम करने
का क्या तरीका है। उस व्यक्ति ने फिर भी चुनाव में कोई संदेह नहीं रहे, इसलिये दो महीने की छुट्टी पर जाने का निर्णय कर अपना बडप्पन दिखाया। अब चुनाव
आयोग को तय करना है कि क्या करना है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आज आयोजित प्रेस कांफ्रेस में मीडिया
कर्मियों के साथ उनके सवाल अविकल रूप में इस प्रकार से रहे ः-
प्रश्नकर्ता ः सी.एस. के छुट्टी जाने के बारे में।
देखिये, स्थिति यह बन गयी है राजस्थान के अंदर अभी तो
चुनाव में डेढ़ महीना बाकी है और वह लोग इतने बौखला गये हैं कि आज जो पोस्टर और बैनर
लगे हुए हैं बसों पर, उनको सरकार ने हटाने का निर्णय लिया कोर्ट ऑफ कंडक्ट के आधार पर, यह लोग उन्हीं हटे हुए पोस्टर या बैनर को वापस चिपकाकर फोटो खिंचवा रहे हैं
और हटाते हुए बता रहे हैं कि देखिये हम हटा रहे हैं। अभियान हमारा चल रहा है। उससे
आप अंदाज कर लीजिये बौखलाहट में किस स्तर पर यह लोग चले गये हैं और उसी तरह के जो आरोप
लगाये जा रहे हैं कि जहर पिलाया जा रहा है। ढाई लाख लोग प्रतिदिन दवाइयां ले रहे हैं।
एक्टिविस्ट को आगे आना पड़ा। उन्होंने कंडम किया उन लोगों को, माफी मांगने की मांग की है, तब भी बौखलाहट के एक शब्द नहीं बोला जा रहा है। आज बताइये देश के कोई कानून
बने हुए हैं, कोई भी मेडिसन बाहर नहीं आ सकती जब तक कि वह
लेबोरेट्री में पूरी तरह टैस्ट नहीं हो जाती दो-तीन बार। हमने और एंश्योर कर रखा है
राजस्थान के अंदर, क्योंकि यह लोग मल्टीनेशनल कम्पनियों से मिले हुए हैं कि माहौल खराब करते ही
मल्टीनेशनल कम्पनियाेंं की दवाइयां बिकने लग जायें और वह वापस कैसे कमाने लग जायें।
इस कांसपेरेंसी के कारण से मल्टीनेशनल कम्पनियों के वेस्टेड इंटरेस्ट पूरे करने के
लिये इन लोगों ने इस प्रकार की चाल चली है कि आज एक्स चीफ मिनिस्टर महोदय दूसरी बार
बोली हैं कि राजस्थान के अंदर जहर पिलाया जा रहा है। इससे बड़ी अनफोर्चुनेट बात और हो
नहीं सकती। जो पेंशन सम्मान है बुजुर्गों को, एकल नारी को, निःशक्तजनों को, उनके लिये कह रहे हैं कि रेवड़ियां बांटी जा रही हैं, रेवड़ियां बंट रही हैं और देश के अंदर फूड सिक्योरिटी एक्ट बन गया है। सरकार
अगर कोई एक्ट लागू करे और सरकार कामयाब हो जाये लागू करने के अंदर, देश में पहली सरकार राजस्थान सरकार है, दिल्ली ने भी, हरियाणा ने भी शुरू किया है, उत्तराखण्ड ने भी शुरू किया है पर हमने पूरी प्रक्रिया करके, क्योंकि बड़ा राज्य हे, एक्ट में पूरी प्रक्रिया दी हुई है, कैसे आप पब्लिक से एप्लीकेशन इन्वाइट करोगे, वह हमने की है। कैसे आप ग्राम सभाएं करोगे, वार्ड सभाएं करोगे, वह हमने किया है। उसके बाद में हमने केन्द्र सरकार को लिखा और वह स्कीम मंजूर
हो गयी। 2 अक्टूबर से हमने उसको लागू कर दिया है। कोर्ट
ऑफ कंडक्ट 4 तारीख से लागू हुआ है। अब अगर मान लीजिये सरकार
गुड गवर्नेन्स के अन्तर्गत हम लोग तो कोर्ट ऑफ कंडक्ट के कारण से आप देख रहे हो कोई
नई घोषणा नहीं कर रहे हैं, पर चीफ सेक्रेट्री की ड्यूटी नहीं है क्या कि जो योजनाएं चल रही हैं, बजट की घोषणाएं हैं, उनको आगे बढ़ाने में, पूरी करने में वह अगर मोनिटरिंग करें तो यह खुशी की बात होनी चाहिये, वैलकम करना चाहिये कि जनता को लाभ मिलेगा। पर क्योंकि वह चाहते हैं कि स्कीमें
लागू नहीं हों और हम यह कहें कि देखिये स्कीमें फेल हो गयीं, वह कागजों में ही रह गयी। इस कारण से पिछले दो-तीने महीने से लगातार देख रहे
हैं, पूरी यात्रा के दरम्यान में अपनी पांच साल की
उपलब्धियां क्या रही हैं, उन्होंने एक उपलब्धि नहीं बताई है। हमने कहा पांच तो बताओ कम से कम। तुलना
करो हमारे में और उनमें क्या फर्क है। वह तुलना नहींं करेंगे। उन्होंने खाली अपनी बात
कहीं सड़क टूट गयी है, कहीं मास्टर नहीं हैं, कहीं नर्स नहीं हैं। यह समस्या देश में हर राज्य में है। चाहे किसी पार्टी
की सरकार हो यह समस्या बनी रहती है। उसको हल करते हैं तो वापस बन जाती है। यह समस्या
कोई बड़ी समस्या नहीं होती। परन्तु किस प्रकार से बौखलाहट केे अंदर आप झूठे आरोप लगवा
रहे हैं। ब्लैक पेपर निकाला, वह आपने देख लिया। वे इतने गिल्टी-कांशस है कि आप स्टेज पर बैठे हुए हो और
मीडिया वाले बैठे हुए हैं, वह एसपेक्ट करते हैं कि आपने जो फिल्म दिखाई है, ब्लैक पेपर जारी किया है तो कम से कम हमारी कोई आशंका या शंका है, उसको दूर करें। उसके बजाय आपने यह तरीका अपनाया कि नहीं हमने दिखा दिया, बस हमारा काम पूरा हो गया। और एक क्वेश्चन पूछ लिया कॉरपेट का, कॉरपेट का क्वेश्चन, क्वेश्चन नहीं है। सरकार ने बकायदा उसकी जांच करवाकर पुलिस में केस दर्ज करवाया
हुआ है। हमने दो साल के अंदर, तीन साल के अंदर कभी भी हस्तक्षेप नहीं किया है। मेरा खुद का मानना है कानून
अपना काम करे। इतना बड़ा कांड, आठ कॉरपेट, जो 150 साल पुराने थे, राजस्थान पत्रिका की खबर के अनुसार भी, ईरानी कॉरपेट थे, एंटिक थे, पता नहीं कितने करोड़ों के होंगे। वह कॉरपेट कहां हैं लंदन में हैं या देश के
अंदर हैं, प्रदेश के अंदर हैं, किसी को पता नहीं है। एक कॉरपेट, जो बीकानेर हाऊस का था, जब उस मैनेजर ने ही मना कर दिया तो हम कैसे .... दे सकते हैं प्राइवेट व्यक्ति
के कहने से? उसको उस जमाने के अंदर ए पी ओ कर दिया। अब सुना
है कि नकली कॉरपेट लाकर वहां जमा करवा दिया गया है। इतनी बड़ी हरकतें जो पूर्व सरकार
कर चुकी है और उनके नेता लोग, अगर एक पत्रकार ने क्वेश्चन पूछ लिया तो आप भड़ककर कहो कि तुम कांग्रेस के एजेंट
हो। यही क्वेश्चन झालावाड़ के अंदर किसी पत्रकार ने पूछ लिया, उसकी पिटाई करवा दी गयी तो यह सब बौखलाहट की निशानी है। अगर चीफ सेक्रेट्री
मोनिटरिंग करे कि गेहूं पहुंचना चाहिये, पेंशन मिलनी चाहिये, दवाइयों की सप्लाई निरन्तर रहनी चाहिये, तो इसमें क्या बुराई है। मुझे बहुत दुःख है कि राजस्थान में ऎसी परम्परा पहले
कभी नहीं रही है। जो मि0 मैथ्यू हैं, 36 साल की नौकरी जिस व्यक्ति की हो, कई सरकारें आईं, कई सरकारें गई हैं। हर सरकार के अंदर इस व्यक्ति ने उस सरकार की चाहे किसी
पार्टी की हो, उसकी क्या पॉलिसी हैं, क्या प्रोग्राम हैं, क्या कार्यक्रम हैं, उसको इम्प्लीमेंट करने का काम ही किया होगा। आज तक उन पर कभी आरोप नहीं लगा
हो। ऎसे व्यक्ति के ऊपर इस प्रकार के आरोप लगाकर आप किसी को डिमोरलाइज करना चाहें, हर व्यक्ति का स्वाभिमान भी होता है, तो मैं समझता हूं कि बहुत अनफोर्चुनेट है। मैं कंडम करता हूं कि इस प्रकार
के स्टेटमेंट जारी करवाये जा रहे हैं सोच-समझकर, घबराकर, कि जो स्कीमें लागू होंगी, गुड गवर्नेन्स दिखेगी, वह दिखनी नहीं चाहिये। इस प्रकार की जो हरकतें की जा रही हैं, ऎसी हरकतें पहले कभी नहीं होती थीं। कई मुख्य मंत्री आये भी हैं, कई मुख्य मंत्री गये भी हैं, कई सरकारें बदली भी हैं, पर राजस्थान में ऎसी परम्परा कभी नहीं रही है। पिछली गवर्नमेंट जब से बनी है, तब से मैं समझता हूं कि नई नई परम्पराएं डाली जा रही हैं, वह परम्परा क्या है, आपको मालूम है। एट पी एम नो सी एम। आपको मालूम है कॉरपेट चोरी हो जाये, ओ एस डी कॉरपेट ले जाए, कोई जवाब ही नहीं दो आप। हाई कोर्ट जाकर स्टे ले लो कि अरेस्ट नहीं करना चाहिये।
रामबाग होटल करप्शन के अड्डे बने हुए थे और वही व्यक्ति आज देश का भगोड़ा है। उसके ऊपर
रेड कार्नर वारंट जारी है। पासपोर्ट जब्त हो चुका है, उससे आज भी आपकी दोस्ती है। इस प्रकार की परम्पराएं, जो पक्ष-विपक्ष के अंदर कटुता पैदा करने की जो डाली गयी है कि आज इनके नेता
इतने डरते हैं। अभी इन्हीं की पार्टी के एम एल ए मि0 छाबड़ा, जब उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया तो मैंने नेता, प्रतिपक्ष को बुलाया कि कम से कम अनशन कर रहे हैं, हैल्थ बिगड़ जायेगी तो ऎसा भय पैदा किया हुआ है कि पक्ष और विपक्ष बात ही नहीं
कर सके। मैं समझता हूं कि यह बहुत अनफोर्चुनेट बात है। इस प्रकार की जो सामन्तशाही, तानाशाही, अहम और घमण्ड के अंदर पहले सरकार चली थी, जिसका खामियाजा प्रदेश ने भुगता है, बिना डायलॉग के जो उस वक्त में आन्दोलन हुए थे,
21 बार फायरिंग हुई, 90 लोग मारे गये उसमें 70 गुर्जर लोग मारे गये। हमारे वक्त में भी गुर्जर लोगों ने आन्दोलन किये, रेल पटरियों पर बैठे थे। हमने बुलाकर बातचीत की, समझाइश की और फायरिंग होना बात छोड़ो, हमने लाठीचार्ज तक नहीं होने दिया। इतना बड़ा फर्क है शासन करने के अंदर। और
उनके विजन की पोल खुल गयी, जो हमारी स्कीम आई हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर में काम हुए हैं पानी के अंदर, बिजली के उत्पादन के अंदर, बिजली के प्लांट बढ़ाने के लिये, और वह तो एक लम्बा आपको मालूम है कि क्या क्या उपलब्धि हुई है, अभी मैं उसमें नहीं जाना चाहूंगा।
पर मैं इतना कहना चाहूंगा कि उस बौखलाहट के अंदर आप कम्पेयर नहीं कर रहे हो
और आप इस प्रकार के अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हो, जो बेतुके आरोप हैं, तथ्यहीन आरोप हैं। आरोप में कोई दम हो तो हमें खुशी होगी करेक्ट करने के अंदर, अपनी गलती सुधारने में खुशी होगी। पर इस प्रकार से जो व्यक्ति 36
साल की सर्विस दिया हुआ हो, उसके ऊपर इस प्रकार से आप आरोप लगा दो, बड़ी अनुफोर्चुनेट बात है।
प्रश्नकर्ता ः पिछले विधान सभा में सी.के.मैथ्यू की तारीफ की थी
और अब अचानक इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं।
आप बिल्कुल ठीक कह रहे हो, मि0 घनश्याम तिवाड़ी, जो ओपनली इन अधिकारी के बारे में उनके क्या विचार हैं, सबको मालूम है। उनके नहीं हैं, मैं समझता हूं कि राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी, राजस्थान के कर्मचारी सब जानते हैं कि इनके काम करने का क्या तरीका है निष्पक्षता
से। एक व्यक्ति निष्पक्षता से काम करना चाहता है फिर भी उन्होंने कहा कि चुनाव में
कोई संदेह नहीं रहे, निष्पक्ष चुनाव हो, कोई संदेह की गुंजाइश नहीं रहे, इसलिये मैं चाहता हूं दो महीने की छुट्टी पर चला जाऊंं। फिर भी उस व्यक्ति
ने यह बड़प्पन दिखाया। अब इलेक्शन कमीशन को तय करना है कि क्या करना है, क्योंकि आप जानते हो कि ऎसे वक्त में इलेक्शन कमीशन ही तय करता है, तो हमने उनके ऊपर छोड़ा है कि वह तय करे।
प्रश्नकर्ता ः डी.जी. साहब पर भी आरोप लगाये थे।
मैंने कहा यह बौखलाहट के अंदर आरोप लगा रहे हैं। वह इलेक्शन कमीशन ही तय करता
है।
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