Thursday, October 17, 2013

सड़क एवं आधारभूत विकास से खुले समृद्धि के नए द्वार

जयपुर 17, अक्टूबर। सड़क तंत्र के विकास से देश-प्रदेश में समृद्धि के नए द्वार खुलते हैं, इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अपने कुशल नेतृत्व में प्रदेश में विगत पांच वर्षों में प्रदेश में सड़को का जाल ही नहीं बिछाया अपितु शहरों से लेकर सुदूर गांवों-ढ़ाणियों तक सड़क तंत्र का प्रभावी विस्तार किया। सड़क विकास की दृष्टि से आज राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। राज्य में पहली बार मैट्रों रेल के साथ ही रेल तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए आगे बढ़कर सहयोग देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
श्री गहलोत की दूरदृष्टि और पक्के ईरादे से ही लगभग पांच वर्ष की अवधि में 5 हजार 611 करोड़ रुपये व्यय कर 11 हजार 34 किलोमीटर लम्बाई के राज्य मार्गों को चौड़ा करने, सुदृढ़ीकरण एवं नवीनीकरण का कार्य किया गया। अन्य जिला स्तर एवं ग्रामीण क्षेत्रों की सड़को के सुदृढ़ीकरण एवं नवीनकरण पर 4 हजार 205 करोड़ रुपये व्यय कर 26 हजार 492 किलोमीटर लम्बाई की सड़कों को मजबूती मिली। सड़क तंत्र को सुदृढ़ करने की दृष्टि से 2 हजार 631 लम्बाई के हाईवे के कार्य किये जा रहे है, जिनकी लागत 3 हजार 590 करोड़ रुपये है।
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने तथा जन आस्था से जुड़े 562 धार्मिक स्थलों को सड़क से जोड़ने के लिए 232 करोड़ रुपये व्यय कर 1 हजार 17 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया। प्रदेश में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 250 से 499 की आबादी वाले 2 हजार 900 गांवों जो गैर मरूस्थलीय एवं गैर अधिसूचित क्षेत्रों में है और भारत सरकार की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शामिल नहीं है, को दो चरणों में राज्य निधि से लगभग 2 हजार 500 करोड़ व्यय कर पक्की सड़क से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार ने 100 से 249 आबादी वाली बस्तियों को विकास की मुख्य में लाने का निर्णय लिया है इसके तहत ऎसे 690 गांवों के लिए 480 करोड़ रुपये की लागत के कार्य स्वीकृत किए गए है।
जयपुर में मैट्रो रेल की महत्वांकाक्षी योजना के फेज प्रथम - ए में 2023 करोड़ रुपये के निवेश से रेल का ट्रायल रन रिकार्ड समय में शुरू हो गया है। इसी के साथ 1126 करोड़ रुपये के 2.3 किलोमीटर लम्बे भूमिगत फेज-बी की आधारशीला प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा रखी गयी। पूरी परियोजना के लिए 9 हजार 732 करोड़ लागत की स्वीकृति भी दे दी गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्र को रेल सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से रतलाम-बासंवाड़ा-डूंगरपुर रेल परियोजना का कार्य शुरू हो चुका है जिसमें राज्य सरकार द्वारा 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही राज्य सरकार ने टोंक को रेल से जोड़ने के लिए भी रेल्वे को सहयोग देने पर सहमती प्रदान कर दी है।
प्रदेश में 54 आर.ओ.बी. का निर्माण कार्य चल रहा है। दो चरणों में इन पर 1100 करोड़ रुपये व्यय होंगे। राज्य में 17 आर.ओ.बी. का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। केन्द्र सरकार ने 1265 रेल्वे अण्डर ब्रीज बनाने की स्वीकृति दी है जिससे राज्य के सड़क परिवहन को मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र आयोजना बोर्ड ने जयपुर व भरतपुर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के काउन्टर मैग्नेट शहर घोषित किया है। डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर जिसकी कुल लम्बाई का 36 प्रतिशत क्षेत्र राजस्थान से होकर गुजरता है के साथ ही दिल्ली - मुम्बई औद्योगिक गलियारा तेजी से नई पीढ़ी के उद्यमियों के भविष्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह राज्य के 60 प्रतिशत क्षेत्र को लाभान्वित करेगा। जयपुर शहर में 150 करोड़ रुपये व्यय कर घाट की गूणी सुरंग आज सुगम यातायात की दृष्टि से महत्वूर्ण बन गई है।

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