Wednesday, October 16, 2013

समझी मूक पशुओं की पीड़ा, पशुपालकों को मिला सम्मान का संबल

जयपुर, 16 अक्टूबर। मूक पशु जो अपनी पीड़ा किसी को कह नहीं सकते, शब्दों के जरिए अपना दर्द बयां नहीं कर सकते। पशुधन की मूक व्यथा को भी मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने समझा और ऐसे फैसले किए जिनसे राज्य का आम पशुपालक अपने पशुधन के रोग से ग्रसित होने पर महंगे उपचार एवं महंगी दवाओं की चिंता से मुक्त हुआ है।
राजस्थान आज देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां इंसान के साथ ही पशुधन को भी निःशुल्क उपचार मिल रहा है। अर्थव्यस्था में प्रगतिशील पशुपालकों एवं काश्तकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित करने की अभिनव पहल करने वाला भी आज राजस्थान देश का एकमात्र प्रदेश है। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत राज्य में पशुपालकों को 2 रुपये प्रति लीटर की दर से अनुदान दिया जा रहा है। इन अनूठी योजनाओं से पशुपालकों को सम्मान एवं आर्थिक संबल मिला है। योजनाओं से लाभान्वित लाखों पशुपालक आज मुख्यमंत्री को दुआएं दे रहे हैं।
प्रदेश के सभी राजकीय पशु चिकित्सालयों में पशुधन की चिकित्सा के लिए सर्वाधिक उपयोग में आने वाली आवश्यक दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराने की दृष्टि से मुख्यमंत्री पशुधन निशुल्क दवा योजना लागू की गई। योजना के तहत सर्वाधिक उपयोग में आने वाली 87 आवश्यक दवाइयां तथा 13 सर्जिकल/ड्रेसिंग मैटेरियल निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना से अब तक 57.5 करोड़ रुपये व्यय करके 214 लाख पशुओं का निशुल्क उपचार किया गया है।
राज्य के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों में दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों को 2 रुपये प्रति लीटर के अनुदान की ऐतिहासिक योजना के अन्तर्गत 45.28 करोड़ रुपये का अनुदान पशुपालकों को प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त डेयरी उत्पादों के वितरण को बढ़ावा देने के लिए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने की दृष्टि से प्रदेश में 10 हजार डेयरी बूथों की स्थापना करना प्रस्तावित है।
राज्य सरकार ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए गत 56 माह में कोऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों के दुग्ध भुगतान में 116 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि की है। गौवंश के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए गौसेवा निदेशालय की स्थापना की गई। इसके साथ ही स्थानीय विधायक कोष से दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के कार्यालय निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।    गौ वंश साहिवाल नस्ल के संरक्षण एवं उन्नयन के लिए 15 करोड़ रुपये की लागत से पशुधन विश्वविद्यालय में पशुफार्म स्थापित किया गया है। पशुपालकों को घर पर ही चिकित्सा सुविधा के लिए सभी 288 तहसीलों में एक-एक मोबाइल वेटेरनरी यूनिट के संचालन का कार्य प्रगति पर है। राज्य में अब तक 248 मोबाइल वेटेरनरी यूनिट का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की पशुपालकों को सम्मान के साथ उन्हें दिए गए संबल के कारण आज राजस्थान पशुधन संख्या और दूध उत्पादन में देष में दूसरा स्थान पर है।

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