जयपुर, 15 अक्टूबर।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने
के संकल्प के साथ योजनाओं का ताना-बाना बुना। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ हर वर्ग के
कल्याण का सपना ही था। अपने पांच साल के शासन काल में उन्होंने राजस्थान के
सर्वांगीण विकास के लिए जो सपने देखे वे धीरे-धीरे यथार्थ के धरातल पर मूर्त रूप
लेते रहे। उनकी सोच यही है कि जब तक समाज का हर वर्ग सबल नहीं बनेगा तब तक विकास
की अवधारणा पूरी नहीं हो सकती।
प्रदेश
में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बनाई गई योजनाओं की वजह से ही आज यह समुदाय विकास
योजनाओं का लाभ लेकर अपना जीवन संवार रहा है। राज्य में पहली बार अल्पसंख्यक
मामलात विभाग का गठन किया गया। अल्पसंख्यकों की बेहबूदी के लिए 200 करोड़
रुपये की राशि से अल्पसंख्यक विकास कोष तथा 3 करोड़
रुपये से वक्फ विकास कोष का गठन किया गया। मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना के
लिए 25
करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। मदरसों में शिक्षा
के प्रसार के लिए 3500 शिक्षा सहयोगियों की भर्ती की गई
तथा पंजीकृत मदरसों में मिड-डे-मील की शुरूआत की गई।
हज
पर जाने वाले मुस्लिम भाई-बहनों की सुविधा और सहयोग के लिए हज हाउस का निर्माण
किया गया। एक ही स्थान पर सभी अल्पसंख्यक कार्यालयों के लिए भवन निर्माण का कार्य
दु्रत गति से आगे बढ़ रहा है। राज्य में दो लाख 26 हजार
874
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को वजीफे दिये गये। पात्र
अल्पसंख्यक छात्राओं को स्कूटी दी गई तथा एक हजार बालिकाओं को कम्प्यूटर में निपुण
होने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। बालिकाओं पर विशेष ध्यान देने के
उद्देश्य से ही समय पर ऋण चुकाने वाली बालिकाओं को शिक्षा ऋण तथा महिला उद्यमियों
को कारोबारी ऋण पर सम्पूर्ण ब्याज राशि की छूट दी गई।
उच्च
शिक्षण संस्थाओं में अल्प आय वर्ग के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की एक लाख रुपये तक
की कॉलेज फीस के पुनर्भरण की व्यवस्था की गई। राज्य में इस समय 6 बालिका
छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं। नये 56 बालक
एवं 56
बालिका छात्रावासों के साथ ही 21 आवासीय
विद्यालय खोले जाने की व्यवस्था की गई। इन प्रयासों से आज राजस्थान में
अल्पसंख्यकों को जीवन के हर पड़ाव में सरकार का साथ मिल रहा है।
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