जयपुर, 14 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री अशोक
गहलोत की राज्य के विकास के लिये दूरगामी सोच की वजह से ही आज राजस्थान देश के
अग्रिम पंक्ति के राज्यों में शुमार है। गरीब की झोपड़ी से लेकर मध्यम वर्ग और उच्च
वर्ग तक हर आदमी को विकास के केन्द्र बिन्दु में सामने रखकर जनकल्याणकारी योजनाओं
का लाभ हर घर तक पहुंच रहा है। फ्लेगशिप योजनाओं, शानदार वित्तीय प्रबन्धन, लघु, मध्यम एवं
दीर्घकालीन योजनाओं के माध्यम से आज राजस्थान निरन्तर आगे बढ़ा हैं। अनेक बड़े
फैसलों से राजस्थान की तस्वीर बदल रही है।
प्रदेश में वृद्धजनों, एकल नारियों एवं मुख्यमंत्री
विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजनाएं लागू की गई। इनका उद्देश्य इस वर्ग को
भावनात्मक सुरक्षा के साथ आर्थिक सहयोग देने की मुख्यमंत्री की मंशा रही है। जिसकी
वजह से आज प्रदेश में 49.4 लाख व्यक्ति लाभान्वित हो रहे
हैं। राज्य में विशेष पेंशन महाअभियान शिविरों के साथ अब तक की अवधि में 35.20 लाख से अधिक जरूरतमंद पेंशन स्वीकृतियां जारी की गई। साथ ही
पूर्व में स्वीकृत 14.20 लाख पेंशन धारकों को भी इसमें
शामिल किया गया।
पेंशन के लिये नियमों का सरलीकरण किया गया। इसके तहत 75 वर्ष से कम आयु
के पेंशनर को 500 रुपये प्रतिमाह, 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को
750 रुपये प्रतिमाह
पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा 75 वर्ष से कम आयु के दम्पत्तियों को
1000 रुपये प्रतिमाह
तथा इससे अधिक आयु के दम्पत्तियों को 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन का लाभ दिया
जा रहा है।
मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन के तहत 18 वर्ष या अधिक
आयु की विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिला
जो राजस्थान की मूल निवासी है, जो यही रह रही हो, उसे भी 500 से 750 रुपये प्रतिमाह
पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन
योजना के तहत 60 हजार रुपये प्रतिवर्ष आय अर्जित करने वाले परिवार के किसी भी
आयु के किसी भी योग्यजन को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत 8 वर्ष से कम आयु
के पेंशन को 250 रुपये प्रतिमाह, 8 वर्ष व अधिक
किन्तु 75 वर्ष से कम आयु
के पेंशन को 500 रुपये प्रतिमाह
तथा 75 वर्ष व अधिक
आयु के पेंशन को 750 प्रतिमाह पेंशन का लाभ दिया जा रहा है।
पेंशन योजना के तहत वृद्धावस्था एवं एकल नारी पेंशन योजना की
पात्रता हेतु परिवार में 25 वर्ष या इससे अधिक के सदस्य नही होने की शर्त को समाप्त किया
गया। अन्त्योदय परिवार एवं आस्था कार्डधारी वृद्धजन, विधवा, परित्यक्ता एवं
तलाकशुदा को भी बीपीएल परिवार के समान पात्रता में छूट दी गई। सहरिया जाति के साथ
ही कथौड़ी, एवं खेरवा जाति
को शामिल किया। पेंशन स्वीकृति के लिये उपखण्ड अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का
गठन किया गया। जिसमें जनप्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया गया है। आज राजस्थान में
लाखों गरीबों के हाथ असहाय होकर किसी से कुछ मांगने के लिये नहीं बढ़ रहे अपितु
राज्य सरकार को दुआएं देने के लिये उठ रहे है।
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