Wednesday, October 23, 2013

माननीय श्री राहुल गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष का खेड़ली (अलवर) की जनसभा में सम्बोधन - दिनांक : 23-10-2013

माननीय श्री राहुल गांधी का भाषण
स्थान : खेड़ली (अलवर)
दिनांक  :  23-10-2013
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गुरूदास कामत जी, डॉ0 चन्द्रभान जी, अशोक गहलोत जी, नमोनारायण मीणा जी, सचिन पायलट जी, जितेन्द्र सिंहजी, लालचन्द कटारिया जी, विश्वेन्द्र सिंहजी, रतन सिंहजी, दीपेन्द्र हुड्डा जी, जुबेर खान जी, मिर्जा इरशाद बेगजी, हमारे कांग्रेस पार्टी के जो नेता सामने बैठे हैं, युवा यहां जो खड़े हैं, महिलाएं यहां जो खड़ी हैं और जो पीछे लोग खड़े हैं, आप सबका यहां बहुत बहुत स्वागत और आप लोग जो घर पर खड़े हो छत पर, आपका भी यहां स्वागत।
शुरू करने से पहले मैं आपसे एक छोटी बात कहना चाहता हूं। आम तौर से जो पार्टी का मेनीफेस्टो होता है, जो पार्टी का घोषणा पत्र होता है, वह बंद कमरों में बनता है। पांच-छह लोग उसको बनाते हैं। सही बात है या गलत  बात है? तो आज मैंने क्या किया है, मैंने कांग्रेस पार्टी में एक टीम को बैठाया है, उनको कहा है देखिये, जो हमारा मेनीफेस्टो है, कांग्रेस पार्टी का जो मेनीफेस्टो है, यह आम जनता से बनाना चाहिये, यहां जो युवा लोग खड़े हैं, उनसे बनाना चाहिये, यह जो महिलाएं खड़ी है, उनको बनाना चाहिये, आप सबको बनाना चाहिये। यह जो राजनीतिक सिस्टम है, जिसका काम बंद दरवाजों में होता है, जिसके अंदर आपकी आवाज नहीं पहुंचती है, उसमें आहिस्ता-आहिस्ता आम आदमी की, महिला की, बुजुर्ग की आवाज अंदर पहुंचानी है। यह काम मैंने शुरू करने के लिये जितेन्द्र जी और यहां सचिन पायलट जी को कहा है तो यह थोड़ा आपको समझायेंगे।
मैंने कांग्रेस पार्टी में कहा है कि जब भी हमारा मेनीफेस्टो बनेगा तो सिर्फ हमारा मेनीफेस्टो नहीं होगा, यह आपका मेनीफेस्टो भी होगा। और मैंने कहा है कि देखिये, सबसे मिलना है। चाहे वह मजदूर हो, चाहे वह महिला हो, गरीब हो चाहे वह किसी जाति का हो, कांग्रेस पार्टी मीटिंग करेगी और जो आपके सुझाव है, उनको लेगी और वह हमारे मेनीफेस्टो में जायेगा और फिर उसको हम लागू करेंगे।
अब मैं अपना भाषण शुरू करता हूं। आप लोगों में काफी जोश है। दो-तीन दिन पहले मैं मध्य प्रदेश गया था और मध्य प्रदेश में जैसे मेरी आदत है, मैंने भाषण दे दिया, शायद आपने टी.वी. में सुना होगा, मैंने अपनी मां के बारे में एक कहानी बता दी। जब पार्लियामेंट में फूड बिल पर चर्चा हो रही थी, सुना आपने।  तब मैंने उनके बारे में कह दिया तो फिर जब मैं वापस आया तो मेरी मां का फोन आया और उन्होंने कहा कि देखो तुम भाषण में मेरी जो कहानी है, वह मत बताया करो। वह मेरे अंदर की बात है और तुम जाकर कह देते हो, मुझे अच्छा नहीं लगता। और उन्होंने मुझे कहा कि अगर तुम कहानी बताना चाहते हो तो तुम अपनी कहानी बताओ, मेरी क्यों बताते हो? और सही है अगर मैं कहानी बताता हूं तो उनकी नहीं बतानी चाहिये, मुझे अपनी बतानी चाहिये और मैं यहां आता हूं कभी-कभी भाषण कर जाता हूं, कहता हूं भइया, भाईचारा होना चाहिये। और मैं कहता हूं दंगा होता है लड़ाई होती है, नहीं होनी चाहिये। आंतकवाद के खिलाफ बोलता हूं मगर मैंने आपसे अपने अंदर की बात नहीं बताई कि मैं आंतकवाद के खिलाफ क्यों बोलता हूं और मेरी सोच क्या है।
देखिये, अगर आप राजनीतिक लोगों को देखें तो मेरे परिवार में दो लोगों को आंतकवादियों ने मारा है। मेरी दादी को और मेरे पिता को, और जब मेरी दादी को मारा था, मैं 14 साल का लड़का था। उस समय छोटा-सा था। हमारे घर में पापा बहुत डिसीप्लेन रखते थे। अगर फिर बदमाशी होती थी, मैं उल्टा-सीधा काम करता था तो पापा डंडा मारते थे और दादी मुझे बचाती थी। चाहे मैं कुछ भी बदमाशी करता था। दादी का छुपा हुआ हाथ मुझे पापा की डांट से बचा देता था। उदाहरण देता हूं। मुझे पालक अच्छा नहीं लगता था और लंच के समय मेरे पिता मेरे सामने पालक रखते थे और कहते थे भइया, इसको खाओ। जब हम सब बैठे होते थे, तो मेरी दादी थाली के ऊपर ऎसे अखबार खोलती थी और उसके पीछे मैं पालक उठाकर दादी की प्लेट में रख देता था और दादी उसको खा लेती थी। इस प्रकार से मेरी दादी जैसे बड़ा पेड़ होता है न, छाया देता है वैसी मेरी दादी मुझे छाया देती थी। उस समय आंतकवाद का समय था, लड़ाई चल रही थी। पंजाब में गुस्सा था, बाकी जगह गुस्सा था। और यह गुस्सा लोगों के दिल में नहीं था, यह डाला गया था। लड़ाई करवाई गयी थी।
जब मेरी दादी चुनाव हारी थी 1977 में, उनको घर से निकाला गया था और हमारे पास घर नहीं था और एक पारिवारिक दोस्त थे मोहम्मद युनूस, उन्होंने अपना घर हमें दिया था और हम उस घर में रहे थे। 1977 में जैसे राजनीति में होता है, जब चुनाव हारा जाता है या सत्ता नहीं होती है तो सब दोस्त चले जाते हैं और हमारा परिवार था, वहां कोई नहीं दिखता था। गेट खाली रहता था मगर सिक्ख व्यक्ति, जो सिक्ख थे, मुझे यहां सिक्ख दिखाई नहीं दे रहे हैं, वह खड़े हैं, जो सिक्ख थे, 1977 में वह व्यक्ति मुझे दिखाई देते थे और वह मेरी दादी के साथ सबसे बुरे समय मेें साथ खड़े थे। अब 5-6 साल में गुस्सा हुआ। मैंने आपको दादी के बारे में बताया। मैं आपको सतवन्त सिंह और बेअन्त सिंह के बारे में भी बता सकता हूं। सतवन्त सिंह और बेअन्त सिंह को मैं जानता हूं और एक प्रकार से वह मेरे दोस्त थे। जैसे हमारे यह बॉडीगार्ड खड़े हैं, ऎसे ही वो थे और उनसे मेरी दोस्ती थी। कोई मुझे बैडमिन्टन सिखाता था, कोई मुझे वर्जिश करना सिखाता था और एक दिन गुस्से के कारण मेरे दोस्तों ने मेरी दादी को मार दिया। मेरे अंदर जैसे यह यहां पर खड़े हैं, जैसे इनके अंदर गुस्सा था, मेरे अंदर भी गुस्सा है। गुस्सा था कि इन दोनों ने यह क्यों किया? क्रोध था मेरे अंदर और मेरे ऊपर वह बोझ बना था। उस क्रोध ने मुझे दबाकर रखा था। एक दिन मुझे यह बात समझ में आ गयी कि वहां जो हुआ, मैं आपको और गहराई में बताता हूं। मैं स्कूल में था, ज्योग्राफी की क्लास चल रही थी और मैं शीशे से बाहर देख रहा था। वहां पर एक पेट्रोल पम्प हुआ करता था। उस समय एक व्यक्ति आये और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को प्रिंसिपल के ऑफिस में जाना है। मैं बदमाश था। मैं प्रिंसिपल के ऑफिस में रोज जाता था। वह उठाकर मुझे ले गये। जब मैं वहां गया, हमारे घर में एक महिला काम करती थी वह फोन पर चिल्ला रही थी। मैंने ऎसी चीख पहले कभी नहीं सुनी थी। मैंने उनसे पूछा पापा कैसे है? क्योंकि मुझे भी डर था, माहौल ऎसा था, तो मैंने उनसे पूछा पापा कैसे हैं, क्योंकि पापा उस समय बंगाल में थे, उन्होंने कहा पापा ठीक है। फिर मैंने कहा मम्मा कैसी हैं, मम्मा ठीक है। फिर मुझे थोड़ी घबराहट हुई, मैंने पूछा दादी कैसी हैं? और फिर उसने कहा कि तुम वापस आ जाओ और फोन रख दिया। मेरा दिल दो-तीन सैकण्ड के लिये रूक गया, अंदर ऎसे लगा कि जैसेे मेरे पेट में किसी ने जोर से घूंसा मारा हो। घर गया एक तरफ दादी का खून था और दूसरी तरफ जो मुझे बैडमिन्टन सिखाते थे, जो मुझे वर्जिश सिखाते थे, उनका खून था। सवाल उठता है कि यह क्यों हुआ? और इसका जवाब मैं आपको देना चाहता हूं, जो मैंने आपको पहले कहा गुस्सा डाला जाता है, गुस्सा होता नहीं है, गुस्सा डाला जाता है। अब आप देखिये मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ। आपने सुना होगा। मैं वहां गया हिन्दू से मिला, मुस्लिम से मिला, अलग-अलग जाति के लोगों से मिला। एक जर्नलिस्ट था, उसको मार दिया। उसके परिवार से मिला। उसकी जो छोटी-सी बच्ची थी, जब वह मुझसे बात कर रही थी और मुझे बता रही थी। मुझे अपनी दादी याद आ रही थी, क्योंकि मैं भी इस आंतकवाद का शिकार हुआ। और सिर्फ मैं अकेला नहीं हूं यहां पर, इस देश में लाखों लोगों पर इस आंतकवाद का असर पड़ता है। गुस्सा डाला जाता है। मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ। कल मेरे कमरे में पुलिस वाला आया। बातचीत हो रही थी। मैंने उनसे पूछा भइया, क्या कर रहे हो? इंटेलीजेंस का था वह। वह मुझे कहता है राहुल जी मुजफ्फरनगर में जो दंगा हुआ है, जो मारपीट हुई, वहां जिन लोगों को मारा गया, वह लोग पाकिस्तान जाना चाह रहे हैं, क्योंकि उनमें गुस्सा है। और मैं उनको ट्रेप कर रहा हूं, मैं उनसे बातचीत करने की कोशिश कर रहा हूं और उनको मैं रोकने की कोशिश कर रहा हूं।
अब देखिये, दंगा कर दिया, गुस्सा डाल दिया और फिर उसके बाद में पूछते हैं भइया, आंतकवाद क्यों हो रहा है। आंतकवाद इसलिये होता है क्योंकि गुस्सा डाला जाता है और अगर हमारी विपक्ष की पार्टी एक काम करती है, तो हिन्दुस्तान के लोगों में गुस्सा डालने की कोशिश करती है। हिन्दू को मुसलमान से लड़ाने की कोशिश करती है और यह इनका फुल टाइम काम है। और जब लोग मरते हैं तो यह दिखाई नहीं देते हैं। मुजफ्फरनगर में हिन्दू मरे, मुस्लिम मरे, बम्बई में हिन्दू मरे, मुस्लिम मरे। तब यह आपको दिखे वहां पर, दिखे? एक नहीं दिखा। मगर यह होता क्यूं है? क्योंकि यह आप लोगों को लड़ाते हैं। यह एक-दूसरे से लड़ाते हैं। अपने राजनीतिक फायदे के लिये लड़ाते हैं। मैं जोर से बोल रहा हूं, क्योंकि यह ठोकर मैंने खाई है, दो बार खाई है।
आप सुन लो यह देश क्रोध से, गुस्से से आगे नहीं जायेगा। यह देश प्यार से आगे जायेगा। यह एक साथ आगे जायेगा। अभी मुझे कहा कि देखिये, शेखावत जी का जन्म दिन है और इन्होंने मुझे कहा कि शेेखावत जी राजपूत नेता थे और उनका जन्मदिन है तो हमें कहना चाहिये, उनका आदर करना चाहिये और यह सही बात है। शेखावतजी अच्छे नेता थे। मगर उनका आदर इसलिये करना चाहिये क्योंकि वह हिन्दुस्तानी नेता थे, इसलिये नहीं कि वह राजपूत नेता थे। शेखावत जी पहले हिन्दुस्तान के नागरिक थे, उसके बाद में वह राजपूत नेता थे और यही बात मैं आपको कहना चाहता हूं। देश आगे बढ़ेगा तो एक साथ बढ़ेगा और लड़ाई होगी तो एक साथ होगी। जीतेंगे तो एक साथ जीतेंगे। मरेंगे तो एक साथ मरेंगे और यह हमारी शक्ति है। जब हम एक साथ खड़े हो जाते हैं, कोई इस देश को नहीं छू सकता। दुनिया में कोई व्यक्ति नहीं है जो इस देश को छू सकता है, कोई शक्ति नहीं है जो इस देश को छू सकती है।
अब मैं थोड़ा राजस्थान के बारे में बोलना चाहता हूं और आपके विकास के बारे में बोलना चाहता हूं। यहां अभी बुजुर्ग आये और उन्होंने गहलोत जी को पेंशन के लिये धन्यवाद कहा। मैं गहलोत जी को कहना चाहता हूं जो आपने यहां मुफ्त दवाई का काम किया है, यह जब हमारी सरकार बनेगी दिल्ली में, तो सिर्फ राजस्थान में लागू नहीं होगा, पूरे हिन्दुस्तान में जाकर लागू होगा। हम भोजन के अधिकार की बात करते हैं और यहां महिलाएं बैठी हैं, यह समझती हैं इस बात को। देखिये, आजकल टी.वी. पर हवाई जहाज दिखाई देता है, ट्रेन दिखाई देती है, कम्प्यूटर दिखाई देता है और यह जो मां बैठी दिखाई देती है, यह सोचती है यहां कम्प्यूटर की बात हो रही है, यहां रेलवे लाइन की बात हो रही है, यहां हवाई जहाज की बात हो रही है,मेरे बच्चे के पेट में भोजन नहीं है।  हमने एक ऎतिहासिक कानून आपको दिया है। एक रूपये किलो अनाज हर परिवार के मैम्बर को पांच-पांच किलो। इस देश में कोई भूखा नहीं रहने वाला है। रोजगार योजना दी। सूचना का अधिकार दिया।
अभी मैं चूरू गया। वहां पर इंदिरा गांधी कैनाल का एक्सटेंशन दिया। पानी दिया। और अब सबसे बड़ा काम यहां पर हो रहा है, उसके बारे में मैं थोड़ा आपको समझाना चाहता हूं। यहां पर लोग पूछते हैं रोजगार की कमी, मुझे रोजगार कब मिलेगा? सही बात है न। अब मैं आपको बताता हूं आपको रोजगार कब और कैसे मिलेगा। हमारी सरकार ने पूरे हिन्दुस्तान में कोरिडोर बनाना शुरू किया है। दिल्ली से लेकर बम्बई, बम्बई से लेकर तमिलनाडु, दिल्ली से लेकर वेस्ट बंगाल तक। फ्रेट कोरिडोर, रेलवे लाइन और फिर इंडस्टि्रयल कोरिडोर। मतलब कारखाने, और एक नहीं बहुत सारे कारखाने, एक के बाद एक, इस कोरिडोर में खोलने वाले हैं।
आपने अलवर का बदलाव देखा होगा। जितेन्द्र सिंह ने कहा है मेट्रो ट्रेन की बात की, फास्ट ट्रेन की बात की। हम आपकी लड़ाई लड़ेंगे। मगर मैं एक बात आपसे कहना चाहता हूं कि अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी, तो कमजोर लोगों की, गरीब लोगों की, युवाओं की सरकार बनेगी। उद्योगपतियों की सरकार नहीं बनने वाली। उद्योगपतियों की जरूर जरूरत है और उनके साथ काम करना है। इसलिये यह देश पार्टनरशिप का देश, अगर उद्योगपति कारखाना नहीं लगा सकता है, अगर वह इंडस्ट्री नहीं लगा सकता है तो गरीब गरीबी से नहीं निकल सकता। मगर फायदा दोनों को होना चाहिये। अगर जमीन की बात है तो किसान की जमीन लिखाकर ले ली। मगर जो अमीर आदमी है, तो उसकी जमीन को आप मार्केट रेट पर लेते हैं। इसलिये हम जमीन अधिग्रहण बिल लेकर आये। चाहे वह गरीब हो, अमीर हो, किसी भी जाति का हो, उसकी जमीन है, उसकी इज्जत होनी चाहिये, उसको फायदा मिलना चाहिये। हमने सिर्फ यही नहीं कहा। हमने यह भी कहा है कि भाई अगर जमीन पर मजदूर काम करता है, ज्यूस की दुकान है, अगर उसकी जमीन ली जा रही है तो उसको भी फायदा मिलना चाहिये और चार गुना फायदा मिलना चाहिये।
यहां देखिये, सबसे बड़ी चीज है युवाओं की शक्ति का प्रयोग करना और हमारा जो राजनीतिक सिस्टम है, और यह हर पार्टी की बात है। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी की बात नहीं है, यह बीजेपी, बी.एस.पी., एस.पी. सबकी बात है। आम जनता से आवाज इन संगठनों के अंदर नहीं है, घुस नहीं पाती। और 500-600 लोग इस देश को चलाते हैं। जब तक आम आदमी की आवाज इन बंद कमरों में नहीं पहुंचेगी, जब तक आपकी आवाज इन बंद कमरों में नहीं पहुंचेगी, जब तक महिलाओं की आवाज इन बंद कमरोें में नहीं पहुंचेगी, तब तक यह देश आगे नहीं जाने वाला है और यह देश इसको हम खोलेंगे आपके लिये, आम आदमी के लिये हम राजनीतिक सिस्टम में जगह बनाकर दिखायेंगे।
अन्त में, मैं आपको एक ही बात कहना चाहता हूं जो मैंने पहले कही। यह आपको एक दूसरे से लड़ाना चाहते हैं। यह चाहते हैं कि हिन्दू मुसलमान से लड़े। एक जाति-दूसरी जाति से लड़े और फिर वह राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। इस राजनीति से लोगों को दर्द होता है, लोग मरते हैं, बच्चों को दुःख पहुंचता है, मां को दुःख पहुंचता है और दूसरी .......( ए साइड कैसेट खत्म)
एन डी ए के समय और यूपीए के समय आप देख लीजिये जितनी सड़कें उन्होंने पांच साल में बनाई, तीन गुना हमने पांच साल में बनाई। यह आंतकवाद की बात करते हैं, आपको याद होगा कश्मीर में क्या होता था, जब एनडीए की सरकार थी और देखो अब क्या हो रहा है। बहुत फर्क आया है क्योंकि हम प्यार की राजनीति करते हैं, सबको जोड़कर ले जाते हैं और यही हिन्दुस्तान को आगे ले जायेगा। आप सब दूर-दूर से आये इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद। जय हिन्द।

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