Wednesday, September 11, 2013

कांग्रेस उपाध्यक्ष माननीय श्री राहुल गांधी का भाषण - सलूम्बर (उदयपुर) – 11.09.2013

गुरूदास कामत जी, अशोक गहलोत जी, डॉ0 चन्द्रभान जी, डॉ0 सी.पी. जोशी जी, डॉ0 गिरिजा व्यास जी, शीशराम ओलाजी, चन्द्रेश कुमारी जी, नमोनारायण मीणा जी, सचिन पायलट जी, लालचन्द कटारिया जी, रघुवीर मीणा जी, ताराचंद भगोरा जी, लालचन्द झाला जी, हरीश चौधरी जी, अशोक जी, कांग्रेस पार्टी के हमारे समस्त कार्यकर्ता और हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों, आप सबका यहां बहुत-बहुत स्वागत, नमस्कार।
आप लोग धूप में आये, दूर-दूर से आये, आप सबका बहुत धन्यवाद और आप जो पहाड़ पर खड़े हो, आपका भी यहां बहुत-बहुत स्वागत। आजकल राजनीति में दो तरीके की सोच है। एक कांग्रेस पार्टी की सोच है और दूसरी हमारे विपक्ष की सोच है। थोड़ा-सा मैं इसके बारे में आपको बताना चाहता हूं। विपक्ष कहता है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर बनना चाहिय, सड़कें बननी चाहिये, पुल बनने चाहिये, एयरपोर्ट बनने चाहिये और उनकी सोच है कि अगर हमने एयरपोर्ट बना दिया, सड़कें बना दीं, हवाई जहाज चला दिये तो यह देश आगे चला जायेगा। हम इस बात को मानते हैं। हमारा भी कहना है कि जरूर सड़कें बननी चाहिये, हवाई जहाज चलने चाहिये, रेल आनी चाहिये, पुल बनने चाहिये। मगर हम एक और बात कहते हैं। हमारा यह कहना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ जो आम आदमी है, जो गरीब आदमी है, जो आदिवासी है, दलित है, जिसके पास पैसा नहीं है, भूखा है, उसकी भी मदद होनी चाहिये और हम कहते हैं कि सिर्फ पैसों से, हवाई जहाजों से, रेलगाड़ियों से यह देश आगे नहीं जायेगा। यह देश जब आगे जायेगा, जब जो लोग उन सड़कों को बनाते हैं, उन पुलों को बनाते हैं, उन रेलगाड़ियों को चलाते हैं, उनके पेट में जब तक खाना नहीं होगा, जब तक उनके पास दवाई नहीं होगी, तब तक यह देश आगे नहीं चलेगा। यह फर्क है हममें और उनमें।
आप देखिये, बड़ी-बड़ी बातें होती हैं और विपक्ष कांग्रेस पार्टी पर आक्रमण करता है और कहता है भाई, कांग्रेस पार्टी ने यह किया, कांग्रेस पार्टी ने वह किया। मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूं। इसके बारे में मेरी क्या सोच है, यह आपको बताने के लिये कह रहा हूं। हजारों साल पहले हिन्दुस्तान में गुरू-शिष्य की परम्परा होती थी। सही बात है, होती थी न ? तो एक गुरूजी वहां पर अपने दो-तीन लड़के थे, उनको कुछ समझा रहे थे, अपना भाषण दे रहे थे। जब भाषण चल रहा था गुरूजी बुजुर्ग थे, काफी ज्ञान था उन्हें, वहां एक व्यक्ति आया और उसने गुरूजी को गाली दी और कहा कि तुम बिल्कुल झूठ बोलते हो, बेकार आदमी हो और उसने 10-15 मिनट उन्हें गाली दी। पर गुरूजी ने उसे कुछ कहा नहीं। वह शांति से बैठे रहे और 10-15-20 मिनट जो व्यक्ति गाली दे रहा था, वह गुस्से में था, वह शांत होकर चला गया। वहां पर गुरूजी के शिष्य बैठे थे, उन्होंने गुरूजी से कहा कि आपने कुछ कहा क्यों नहीं ? आप इतने शांत क्यों बैैठे रहे ? उसने गाली दी आपको, आपके बारे में बहुत गलत बोला, मगर आपने कुछ क्यों नहीं कहा ? गुरू ने कहा कि देखो वह यहां आये और मेरे लिये एक तोहफा लाये। तोहफा उनका गुस्सा था। तोहफा उन्होंने मुझे दिया और मैंने लिया नहीं। 10-15 बार वह चिल्लाये। मैंने तोहफा लिया नहीं, 15-20 मिनट बाद वह चले गये। अपना गुस्सा ले गये, मैंने जो करना था, मैं कर रहा हूं।
हम यहां किसी के बारे में गलत नहीं बोलेंगे। जितनी भी गाली देना हो, जितना भी आक्रमण करना हो, हमारे विपक्ष के लोग कर सकते हैं। करो, मजे लो, गाली दो, मगर जो गुस्सा है, वह आपका है, हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे, हम आपका तोहफा नहीं लेंगे। सीधी बात है। क्योंकि हम कांग्रेस पार्टी के सिपाही हैं और हम इस देश की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारे सपने इस देश के सपने हैं। यह जो जनता आई है, यह जो महिलाएं दूर-दूर से आई हैं, आपकी लड़ाई, हमारी लड़ाई है। हमारे अपने जो सपने हैं, मेेरे अपने जो सपने हैं, उनको मैं कुचलना चाहता हूं और आपके जो अपने सपने हैं, उनको मैं अपना बनाना चाहता हूं।
अब मैं थोड़ा आपके बारे में कहना चाहता हूं। इस सोच में भी फर्क है हमारे और हमारे विपक्ष में। हम कहते हैं कि हिन्दुस्तान एक गुलदस्ता है और उसमें बहुत सारे फूल है, अलग-अलग तरीके के और हम चाहते हैं इस गुलदस्ते में हरेक फूूल दिखाई दे, हरेक फूल चमके। चाहे वह आदिवासी हो, चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिक्ख हो, किसी भी वर्ग का हो, कहीं का भी हो। हम चाहते हैं कि सब लोग एक साथ प्यार से चमकें। हम चाहते हैं कि अगर आदिवासियों की भाषा हो, सबको सुनाई दे। 
हमने आम आदमी का काम किया है। हमने वायदा किया था कि सरकार आयेगी तो गरीबों की आयेगी, आदिवासियों की आयेगी और चाहे कोई भी कुछ कह दे, राजस्थान की सरकार ने और दिल्ली की सरकार ने गरीबों के लिये काम करके दिखाया। बहुत काम किया है। दो-तीन कामों के बारे में आपसे कहना चाहता हूं। सबसे बड़ा काम रोजगार योजना, जहां करोड़ों लोगों को हमने गारण्टी देकर काम दिया। विपक्ष के लोग पार्लियामेंट में कहते थे कि इसके लिये पैसा कहां से आयेगा ? हमसे पूछते थे पार्लियामेंट हाऊस में, पैसा कहां से आयेगा ? हमने काम करके दिखाया और करोड़ों लोगों को फायदा मिला। आप छोटे से छोटे गांव में चले जाइये और पूछ लीजिये। वहां लोग आपको बतायेंगे कि कांग्रेस पार्टी ने हमें रोजगार दिया, इज्जत दी। अब इससे भी बड़ा काम किया है भोजन का अधिकार का बिल पास करवाया। विपक्ष के लोगों को जो भी करना था, किया। पार्लियामेंट को रोका, पार्लियामेंट में तमाशा किया, उल्टी-सीधी बातें बोलीं, काम रोकने की कोशिश की। मगर सोनिया जी, मनमोहन सिंह जी लगे रहे। और अन्त में हिन्दुस्तान के हर नागरिक को हमने भोजन की गारण्टी दिलवाई और यह काम कोई मामूली काम नहीं है। हमारे इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि इस देश में कोई भी भूखा नहीं रहेगा।
गिरिजा व्यास जी ने नारा दिया अभी, आधी रोटी खायेंगे, कांग्रेस पार्टी को लायेंगे। यह गलत नारा है। तीन-चार रोटियां खायेंगे और कांग्रेस पार्टी को लायेंगे। पुराना नारा है, गलत नहीं है, पुराना है। अब यह नहीं चलेगा, क्योंकि आज इस देश में कोई भूखा नहीं रहेगा और गहलोत जी ने मुफ्त दवाई की बात की। देखिये, कुछ दिन पहले यू.पी. में मैं कुछ मजदूरों से बात कर रहा था। मैंने उनसे कहा कि थोड़ी अपनी जिन्दगी के बारे में बताओ। उन्होंने कहा कि सुबह उठते हैं, लेबर का काम करते हैं। खाना नहीं मिलता। दो-तीन दिन हम काम कर पाते हैं। दो-तीन दिन बाद हमें बुखार आ जाता है। बुखार आने के बाद हम अस्पताल जाते हैं और जो हमने पिछले दो-तीन दिन में कमाया, वह दवाइयों में चला जाता है और यही हमारी जिन्दगी है।
गहलोत जी ने क्या किया, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी क्या कर रही है ? उन गरीबों को मुफ्त में गारण्टी करके दवाई दे रही है। जो पहले आपको अपनी चांदी देनी पड़ती थी दवाइयों के लिये, अब आपको वह काम नहीं करना पड़ेगा। तो आपका जो नारा है आधी रोटी खायेंगे वाला, उसको मैं बदलना चाहता हूं। पूरी रोटी खायेंगे, 100 दिन काम करेंगे, दवाई लेंगे और कांग्रेस पार्टी को लायेंगे।
देखिये, मैं आपको बताना चाहता हूं कि दिल्ली में सोच है कि यह देश गरीबों के बल पर नहीं बढ़ता है। अगर आप दिल्ली के जो कमरे होते हैं, उनमें बात करें, तो वह आपको कहेंगे कि यह तो गरीब लोग हैं, यह हिन्दुस्तान की सोच है और यही सोच हमारे विपक्ष की है कि जो गरीब लोग हैं, आदिवासी लोग हैं, दलित हैं, यह लोग हैं, मगर यह हमारे ऊपर एक बोझ है और हमारी सोच अलग है। हम कहते हैं कि अगर यह देश आगे बढ़ा है, तो यह जो जनता यहां आई है, जो पहाड़ों पर खड़ी है, यह देश इनके पसीने से, इनके खून से आगे बढ़ा है और अगर हम इन लोगों को फायदा नहीं पहुंचायेंगे, अगर हम इन लोगों को शक्ति नहीं देंगे तो हमारे लिये राजनीति में होने का कोई मतलब नहीं है, यह हमारी सोच है।
अशोक जी ने यहां पर आदिवासियों के लिये विश्वविद्यालय खोला। क्यों खोला ? क्योंकि हम चाहते हैं कि आपके जो युवा हैं, आपके जो बच्चे हैं, वह अपने पैरों पर खड़े हों। वह हिन्दुस्तान को आगे बढ़ाने में मदद करें। यहां रेल्वे लाइन लाये। कितने हजार करोड़ रूपये की ? 1200 करोड़ रूपये की रेल्वे लाइन लाये। क्यों लाये ? क्योंकि जो आदिवासी युवा है, वह हिन्दुस्तान से जुड़ सके। ट्रेनिंग सेंटर खोले, क्यों खोले ? क्योंकि आदिवासी जनता, आदिवासी युवाओं को ट्रेनिंग मिले और वह इस देश को आगे बढ़ायें। हम जानते हैं कि आप लोग इस देश को बनाते हो। आप ज्यादा बोलते नहीं हो, काम में लगे रहते हो। मगर आपकी शक्ति इस देश को बढ़ाती है। आपके बिना यह देश आगे नहीं बढ़ सकता है, सीधी बात है। और हमारे विपक्षी इसलिये विरोध करते हैं, क्योंकि हम आप पर भरोसा करते हैं।
अब आप देखिये उड़ीसा में नियामगिरी पहाड़ था। उस पहाड़ की आदिवासी लोग पूजा करते थे। बड़े उद्योगपति ने वहां जाकर कानून को नहीं देखा। बीजेडी की सरकार थी। कानून को नहीं देखा, सीधी जमीन हड़प ली। हम गये, आपकी लड़ाई लड़ी। आपकी जमीन है। कम से कम आपकी जमीन है तो आपको पूछना चाहिये भइया, आप क्या सोचते हो इसके बारे में ? सही बात है, गलत बात है। पूछना तो चाहिये ना ? कोई बड़ा आदमी होता है, जब उससे कोई घर लेता है, खरीदता है तो उससे पूछता है भइया, मैं आपका घर खरीदना चाहता हूं, लेना चाहता हूं, ले सकता हूं? इसलिये हमने भूमि अधिग्रहण बिल पास किया कि वह आदिवासी की जमीन है, जो आम आदमी की जमीन है, उसका हक उसको मिले। इसलिये हम ट्राइबल बिल लाये, इसलिये हमने 30 हजार पट्टे बांटे। हम आपका हक आपको देना चाहते हैं, क्योंकि आपको जब आपका हक मिलेगा, तो इस देश को शक्ति मिलेगी और यह देश आगे बढ़ेगा।
राजीव जी पंचायती राज लाये और आज राजस्थान में लागू है। पंचायती राज क्यों लाये? क्योंकि हम आपको शक्ति देना चाहते हैं। आपके गांव में जो काम हो, वह आप करवाओ। यह नहीं कि दिल्ली में कोई अफसर बैठा है और वह आपके भविष्य के बारे में कानून बना रहा है। हम लोग चाहते हैं कि आप लोग कानून बनाने में शामिल हों। आप लोग शामिल हों गांव में। आपकी जमीन है, आपका हक होना चाहिये। यह हमारी लड़ाई है और हम कहीं नहीं जाने वाले हैं।
विपक्ष को गुस्सा क्यों आता है, क्योंकि वह जानते हैं कि आम आदमी की जो शक्ति है, गरीब आदमी की जो शक्ति है, वह कांग्रेस पार्टी के अंदर है और वह जानते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ लड़ते हैं, तो वह हिन्दुस्तान के गरीब के खिलाफ लड़ रहे हैं और वह लड़ाई कभी नहीं जीती जा सकती। अंग्रेजों को हरा दिया, भगा दिया हिन्दुस्तान के गरीबों ने, गांधीजी ने, कांग्रेस पार्टी ने। हम कहीं नहीं जाने वाले हैं। मैं आपको सिर्फ यह बताने आया था कि आपके सिपाही दिल्ली में बैठे हुए हैं और आप अपनी लड़ाई गांव में लड़ो, शहरों में लड़ो और हम आपकी लड़ाई लोकसभा में लड़ रहे हैं और आपके जो हक हैं, हम आपको दिलवायेंगे। चाहे कुछ भी हो जाये, आप देखना और सरकार बनेगी, तो गरीबों की, आम आदमी की सरकार बनेगी। आपके अधिकारों की सरकार बनेगी, आपके हक की सरकार बनेगी।
आप दूर-दूर से आये, इसके लिये आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद और यहां जो आपने अपना नाच दिखाया हमें, इसके लिये आपको भी बहुत बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द। नमस्कार।

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