जयपुर,
9 नवम्बर। राज्य में सुदूर क्षेत्रों में बसे हमारे आदिवासी लोगों का
कल्याण सदैव प्राथमिकता में रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अनुसूचित जनजाति के
उत्थान के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे हैं। उन्होंने इस वर्ग के बीच जाकर उनके जीवन
को निकटता से देखने के साथ ही उनके कल्याण के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की गई
ताकि यह वर्ग भी मुख्यधारा से जुड़कर विकास में अपनी भागीदारी निभाये।
राज्य
में अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए पहली बार वास्तविक बजट प्रावधान निर्धारित
किया गया। वनाधिकार अधिनियम, 2006 के
तहत 32589
अधिकार पत्र वितरित किए गए। पूर्व में बारा जिले में सिर्फ किशनगंज एवं शाहबाद
तहसील के सहरिया व्यक्तियों को 25
प्रतिशत आरक्षण का लाभ देय था। अब बारां जिले की सभी तहसीलों में निवासरत सहरिया
व्यक्तियों को 25
प्रतिशत आरक्षण का लाभ उपलब्ध कराया गया है। सहरिया परिवारों को उपलब्ध कराए जा
रहे 35 किलो
प्रति माह निःशुल्क गेहूं के साथ-साथ 2 किलो
दाल,2 लीटर तेल एवं 1 लीटर
देशी घी भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
अनुसूचित
(टीएसपी) क्षेत्र हेतु 200 करोड़
रुपये के विशेष पैकेज के क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है। अनुसूचित जनजाति
क्षेत्र में क्षय रोग ;ज्ठद्ध
के सफल इलाज हेतु 4,919
गांवों में स्वास्थ्यकर्मियों को नियुक्त किया गया,
जो
मरीजों के पूर्ण स्वस्थ होने तक फॉलोअप करने व स्वास्थ्य संबंधी प्रेरक के रूप में
काम कर रहे हैं। बारां जिले के किशनगंज एवं शाहबाद तहसील के गांवों में कुपोषण,
क्षय
रोग एवं अन्य प्रकार की गंभीर बीमारी के रोगियों की पहचान एवं पूर्ण स्वस्थ होने
तक आवश्यक कार्यवाही करने हेतु, सहरिया
जाति की 400
महिलाओं को प्रशिक्षित कर नियुक्त किया गया।
राज्य
में पीसा अधिनियम, 1996 के
तहत पंचायतों को विशेष अधिकार प्रदान किया गया है। जनजाति कल्याण निधि के अन्तर्गत
150 करोड़ रुपये की योजनाएं प्रगतिरत हैं। सम्पूर्ण
बारां जिले के सहरिया परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज क्रियान्वित किया गया।
समस्त सहरिया क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को दोगुना पूरक पोषाहार दिया जा रहा है।
अनुसूचित क्षेत्रों में 5 हजार
मछुआरों को नावें, जाल
इत्यादि का वितरण जीविकापार्जन हेतु उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
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