Monday, November 11, 2013

महत्वाकांक्षी परियोजनाएं बदलेंगी राजस्थान का भविष्य

जयपुर, 11 नवम्बर। राज्य सरकार ने करीब पांच साल के अपने शासन काल के जहां हर वर्ग की बेहबूदी के लिये महत्वपूर्ण निर्णय लिये वहीं अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से राजस्थान का भविष्य बदलने की नीव भी रख दी है।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की दूर दृष्टि, पक्का इरादा और अपने संकल्प को मूर्त रूप देने का अनुशासन ही आज इस मरु प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा करती है। प्रदेश में रिफाइनरी सह-पेट्रोलियम संकुल, जयपुर मेट्रों, रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर लाइन, बाडमेर लिफ्ट परियोजनाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं के माध्यम से आज राजस्थान तेज गति से आगे बढ रहा है। ये सभी योजनाएं प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
बाड़मेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में काले सोने की चमक भविष्य के दूरगामी परिणाम बता रही है। यहां नब्बे लाख टन क्षमता की रिफाइनरी सह-पेट्रोलियम संकुल की स्थापना की जा रही है। इस पर 37 हजार 229 करोड़ रुपये की लागत आयेगी तथा इसकी निर्माण अवधि में ही 1.25 लाख एवं ऑपरेशन के दौरान 1.39 लाख व्यक्तियों को रोजगार मुहैया होगा। जयपुर में 9 हजार 732 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जयपुर मेट्रों रेल परियोजना का कार्य भी तीव्र गति से चल रहा है। परियोजना के प्रथम चरण-ए मेंं 2 हजार 83 करोड़ रुपये की लागत से मानसरोवर से चांदपोल तक का काम लगभग पूर्ण हो रहा है। इस चरण में मेट्रों रेल का ट्रायल रन भी चल रहा है और वह दिन ज्यादा दूर नही जब गुलाबी नगर के लोग मेट्रों रेल का आनन्द लेंगे। जयपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से ऎतिहासिक घाट की गूनी परियोजना भी पूरी हो चुकी है।
प्रदेश के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिले रेल लाईन से जुड़े, इसके लिये राज्य सरकार ने कुल लागत का 50 प्रतिशत (1200 करोड़ रुपये) एवं भूमि उपलब्ध करवाकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस दिशा में 200 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त रेलवे में जमा करवा दी गई है। इसके तहत 176 किलोमीटर रेलमार्ग पर 2083 करोड़ रुपये व्यय होंगे। राज्य के सहयोग से देश में पहली बार रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल लाईन का निर्माण किया जा रहा है। मरुस्थल में हिमालय का मीठा पानी सुलभ करवाने की अभूतपूर्व पहल की गई है, जिसके तहत 688 करोड़ रुपये की लागत से बाड़मेर लिफ्ट परियोजना पर कार्य किया, जिससे जिले के 529 एवं जैसलमेर के 162 गांवों को मीठा पानी उपलब्ध हो रहा हैं।
प्रदेश में बिजली क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों के परिणामस्वरूप सूरतगढ़ सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन में आधुनिक सुपर क्रिटिकल तकनीक आधारित ईकाइ 7 एवं 8 (2ग्660) की स्थापना का कार्य आरम्भ हो चुका है। जिस पर 7920 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। जनवरी 2009 में सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित 660 मेगावाट की दो और ईकाइयां लगाने की स्वीकृति भी जारी की जा चुकी थी।
राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना के द्वितीय चरण के नागौर जिले के जायल कस्बे में अब तक की प्रदेश की सबसे अधिक लागत की इस परियोजना का 20 जून, 2013 को शिलान्यास किया गया। इसकी अनुमानित लागत 2938 करोड़ है। इससे नागौर जिले के 6 शहरों के 890 गांवों के 23 लाख लोगों को इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से हिमालय का पानी उपलब्ध होगा। इसी प्रकार सुजानगढ़-रतनगढ़ पेयजल परियोजना का शिलान्यास 23 सितम्बर, 2012 को किया गया था। जिस पर 971.21 करोड़ रुपये की संशोधित स्वीकृति भी जारी कर दी गई। परियोजना से 13 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा।

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