Saturday, October 12, 2013

मुख्यमंत्री कौन होगा यह चुनाव के बाद की बातें, हमारा मकसद सत्ता में कैसे आएं, इसी रूप में काम - करोड़ों के कारपेट चोरी के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का स्टे, सवाल पर वसुंधरा की बौखलाहट क्यों ? - गहलोत

जयपुर, 12 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा है कि हमारा पहला मकसद है कि हम सब चुनाव जीतकर फिर से सत्ता में कैसे आएं। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, यह चुनाव के बाद की बातें हैं। मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि हम इसी ध्येय को लेकर और उसी रूप में काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टिकटार्थियों के चयन की प्रक्रिया बड़ी स्मूथली चल रही है। सब खुलकर बात कर रहे हैं, कोई पूर्वाग्रह नहीं है, कोई कटुता नहीं है, कोई गुटबाजी नहीं है। सब की भावना एक है कि हम कैसे चुनाव में कामयाब हों। यह पार्टी के लिए शुभ संकेत है। पहली सूची के बारे में उन्होंने कहा कि यह तारीख तो पार्टी उपाध्यक्ष पार्टी अध्यक्ष से बात कर तय करेंगे।
श्री गहलोत ने गुरूवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए भाजपा तथा उनकी प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती वसुंधरा राजे पर जमकर प्रहार किए। श्री गहलोत ने कहा कि उनका ब्लैक पेपर तो अपने आप में व्हाइट हो गया। वे खुद एक्सपोज हो गईं। उनकी नैतिक हार भी हो गई। उन्होंने कहा कि जिनके उपर भ्रष्टाचार के इतने आरोप लगे हों, भ्रष्टाचार की जननी के रूप में जो सरकार जानी जाती हो उस वक्त, वो किस मुंह से प्रेस वालों को प्रेस कांफ्रेंस में उनके प्रश्न का जवाब देतीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारपेट चोरी होने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री भड़क गईं। यह मामला तो पहले से पुलिस की तफ्तीश में है। आठ कारपेट चोरी हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी. ले गए हैं। ट्रक में भरवाए हैं। वह डेढ सौ वर्ष पुराने थे। खासा कोठी के कीमती कारपेट थे। करोड़ों की संपत्ति थी। हमने पूरी जांच करवा कर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई। गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्टे ले लिया उन्होंने। इन सब बातों का वसुंधरा जी के पास कोई जवाब नहीं था। इसीलिए वे सवाल पर भड़क गई। सरकार में होने के बावजूद हम तफ्तीश में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से मीडियाकर्मियों की बातचीत अविकल रूप में इस प्रकार से है: -
प्रश्नकर्ता: प्रत्याशियों के चयन के बारे में।
अभी तो एक राउण्ड तो हो चुका था पहले, दूसरा राउण्ड शुरू होगा। पहले राउण्ड में मैम्बर ऑफ पार्लियामेंट से और ए आई सी सी मैम्बर्स की राय सुनी गयी। अब उसके बाद में आगे प्रोसेस शुरू होगा। तब जाकर मैं समझता हूं आगे जो फैसले होंगे, उसके बाद में संभव होगा। प्रक्रिया बड़ी स्मूथली चल रही है। सब लोग खुलकर बात कर रहे हैं। सबका ध्येय एक ही है कि हमारा असेसमेंट क्या है उम्मीदवार के बारे में, वह बताते हैं, कोई पूर्वाग्रह नहीं है, कोई कटुता नहीं है, कोई गुटबाजी नहीं है। सब मिलकर कैसे असेसमेंट में हो सकता है। एरर हो सकती है, एरर ऑफ जजमेंट हो सकता है किसी का भी, पर सबकी भावना एक है कि हम कैसे चुनाव में कामयाब हों। यह पार्टी के लिये बहुत शुभ संकेत हैं और पार्टी उस रूप में ही तैयारी कर रही है।

प्रश्नकर्ता: महिलाओं और युवाओं को टिकिट देने के बारे में।
युवाओं और महिलाओं को प्रिफरेंस दी है और यह बात तो राहुल जी भी कह चुके हैं और नये चेहरे आयेंगे, संभव होगा उनको वहां प्राथमिकता मिलेगी। उनका पार्टी में क्या कांट्रीब्यूशन है और जीत की संभावना दिख ही जाती है पॉलिटिकल पार्टी के अंदर, वह देखी जायेगी। इस रूप में तमाम प्रक्रिया चल रही है और मैं समझता हूं कि बहुत अच्छे ढंग से प्रक्रिया शुरू हुई। नम्बर दो राहुल गांधीजी ने यह पहली बार किया है कि आप इलेक्शन कमेटी के मैम्बर्स को सब कमेटी बनाकर जिले में भेजा गया, संभाग में भेजा गया और हर केंडिडेट के इंटरव्यू लिये गये हैं। उससे कम से कम केंडिडेड को लगे कि अगर मेरी हैसियत है तो मैं अपनी हैसियत को बता रहा हूं। वह जानते हैं कि सबको टिकिट मिलने वाला नहीं है। पर कम से कम उसका जो इन्वॉल्वमेंट हुआ है कि मेरी राय जानी जा रही है, उसके बाद में फैसला होगा तो मैं समझता हूं उससे हमारी पार्टी में एकता बनी रहेगी और टिकिट तो एक को मिलने वाला है, सबको मालूम है तो बाकी लोग भी साथ देंगे।

प्रश्नकर्ता: पहली सूची कब तक जारी कर दी जायेगी?
यह डेट तो चेयरमैन, स्टेंडिंग कमेटी है, वह वाइस प्रेसीडेंट, कांग्रेस प्रेसीडेंट से बात करके तय करेंगे। पार्लियामेंट बोर्ड कब बैठता है, क्योंकि पांच राज्यों के चुनाव हैं तो टाइम टेबिल वह जानते हैं, पर मैं समझता हूं इस महीने के अंदर शुरूआत हो जायेगी।
प्रश्नकर्ता: मुख्य मंत्री के उम्मीदवार के बारे में।
देखिये, कांग्रेस पार्टी में हमेशा मुख्य मंत्री का उम्मीदवार कोई नहीं बनता है। मुख्य मंत्री कौन बनेगा, यह चुनाव के बाद की बातें हैं। हमारा पहला ध्येय है कि हम सब चुनाव जीतकर कैसे वापस आयें, पार्टी कामयाब हो इस देश के अंदर और जैसी हमने परफोर्मेन्स दी है, गुड गवर्नेन्स दी है, अच्छे फैसले किये हैं, वह और आगे बढ़े। हमारा पहला मकसद यह है पार्टी वापस चुनाव जीते और जो फैसले किये हैं उनको और आगे बढ़ाये, यह मकसद है। कौन मुख्य मंत्री बनेगा, यह चुनाव के बाद की बातें हैं, यह मैं स्पष्ट करना चाहूंगा और उसी रूप में हम काम कर रहे हैं। मुख्य मंत्री कौन बनेगा, कौन नहीं बनेगा, उस रूप में हम कोई काम नहीं कर रहे हैं और आपने देखा होगा पूरे प्रदेश के अंदर यही माहौल है, जिस रूप में रेस्पांस मिल रहा है पब्लिक का। अब वह दुर्भाग्य है कि विपक्ष के पास कहने को कोई मुद्दे नहीं हैं तो वह लोगों को डिमोरलाइज कर रही है, उनका मनोबल तोड़ रही है कि दवाइयों के नाम पर जहर पिला रहे हैं, रेवड़ियां बांट रहे हैं। इस प्रकार की बातें करना मैं समझता हूं कि विपक्ष को शोभा नहीं देता है। जिस रूप में वह विचारधारा की बात नहीं कर रहे हैं। अपने शासन में उनकी पांच साल की उपलब्धियां क्या थीं, वह पांच उपलब्धियां नहीं बता पा रहे हैं। हमारी क्या कमियां रहीं, वह नहीं बता पा रहे हैं और कहीं नर्स नहीं है, कहीं मास्टर नहीं है, यह तो हर सरकार में कमियां रहती ही रहती हैं। इनको दूर करने का प्रयास हम करते रहते हैं तो नई तकलीफ पैदा हो जाती है। आज सबसे बड़ी बात यह है कि साढ़े चार साल तक तो वह विपक्ष गायब रहा। अब 6 महीने में वह जाग के आये। उनको मालूम नहीं साढ़े चार साल में हमने क्या-क्या फैसले किये हैं। यह जो बात कही जाती है कि साहब चुनाव के वर्ष में ही सब फैसले हुए, यह बहुत ही गलत बात है। आप उठाकर देख लीजिये हर बजट में आप पायेंगे कि हमारी जो स्कीमें थीं, चाहे वह गेहूं की स्कीम थी बी पी एल परिवारों के लिये तो साढ़े तीन-चार साल पहले की स्कीम थी। दवाइयां फ्री की स्कीम थी, तीन साल उस स्कीम को हो गये। पशुओं की दवाइयां फ्री करने की स्कीम थी, उसको ढाई-तीन साल हो गये। तमाम स्कीमों का प्रभाव पड़ते-पड़ते टाइम लगता है। अब यह प्रचार करते हैं कि चुनाव आ गये इसलिये इस प्रकार के फैसले हो रहे हैं, वह गलत बात है।

प्रश्नकर्ता: वसुन्धरा जी द्वारा ब्लैक पेपर जारी करने के बारे में।
मैंने कहा न आपको कि खुद इतनी गिल्टी कांशस है पूर्व मुख्य मंत्री वसुन्धरा जी, इनकी हिम्मत भी नहीं हुई, वह बैठा दी गयी वहां पर। उनका जो डेलीगेशन गया था, तब भी वह वहां नहीं गयी थीं। उनकी नैतिकता भी नहीं कि वह बाद में वहां जाकर बैठतीं। जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के इतने आरोप लगे हों, भ्रष्टाचार की जननी के रूप में जो सरकार जानी जाती हो, उस वक्त में वह किस मुंह से वहां बैठकर प्रेस वालों को सवाल-जवाब का अवसर देती हैं। इसलिये आप कल्पना कर लो कि जो फिल्म दिखाई जा रही है, ब्लैक पेपर बांटे जा रहे हैं और इतनी इम्पोर्टेन्ट प्रेस कान्फ्रेन्स को मान रहे थे। आपने चीफ सेक्रेट्री को, ए.सी.बी के एडीजी को, गवर्नर महोदय को, लोकायुक्त को राष्ट्रपति भवन  ........। खाली प्रचार करने के लिये आपने यह सब ध्ंाधे किये। उनका संकलन करके आपने मीडिया को दिया और फिर कह दिया कि हमें कुछ कमेंट करने ही नहीं हैं। मैं समझता हूं वहीं उनकी नैतिकता की हार हो गयी। नम्बर दो जैसे ही किसी प्रेस वाले ने पूछा कि जो आठ कॉरपेट चोरी हुए हैं या आपके ओ.एस.डी. ले गये हैं, मौजूद हैं कि ले गये हैं। आपके अधिकारी लोगों ने दिये हैं, ट्रक में भरवाये हैं आठ कॉरपेट। वह 150 वर्ष पुराने थे, खासाकोठी के कीमती कॉरपेट थे। उनको पता नहीं वह करोड़ों की सम्पत्ति थी, वह गायब हो गये। हमने पूरी जांच करवाकर के पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई। हाई कोर्ट से उन्होंने स्टे करवा लिया अरेस्ट होने का। इसका उनके पास में कोई जवाब नहीं था। क्वेश्चन पूछते ही वह भड़ककर कहते हैं आप कांग्रेस के एजेण्ट हो। वह क्वेश्चन पूछा जो आलरेडी पुलिस की तफ्तीश के अंदर है। हाई कोर्ट के अंदर स्टे किया उस अधिकारी को अरेस्ट करने के लिये। प्रक्रिया चल रही है, हम तफ्तीश में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं, सरकार में होने के बावजूद भी। पर आप इस प्रकार भड़क रहे हो। मैं समझता हूं वह काला पेपर अपने आप में व्हाइट हो गया उससे। और जिस रूप में उनकी हालत खराब हुई है, वह आप खुद समझ सकते हो कि पूरी तरह वह खुद एक्सपोज हो गये। कोई तथ्य के बगैर आप आरोप लगा रहे हो। वह आरोप हम पहले ही खारिज कर चुके हैं। हाई कोर्ट तक जा चुके हैं वह आरोप, सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। हमने वहां पर कैवियट फाइल नहीं की। ना सुप्रीम कोर्ट के अंदर की, ना ही हाई कोर्ट के अंदर की। और वहां पर उनकी अपीलें और जो एफेडेविट दिये वह डिसमिस हुए। उनको पूरा मौका दिया गया, हाई कोर्ट में भी और सुप्रीम कोर्ट के अंदर भी उसके बाद में जजमेंट दिये हैं और पूरा लिखित में जजमेंट हुआ है। वह कोई पढ़ेगा तो उनको मालूम हो जायेगा कि किस तरह इनकी धज्जियां उड़ी हैं। तब भी क्या है एक झूठ को सौ बार बोलो तो सच का अहसास होने लगता है, उस थ्योरी पर वह लोग काम कर रहे हैं।

प्रश्नकर्ता: राहुल गांधी के दौरे के बारे में।
23 तारीख को उनका प्रोग्राम बना है। तैयारी चल रही है। अभी हम बात करके आये हैं।

प्रश्नकर्ता: सोनिया गांधीजी के प्रोग्राम के बारे में।
वह भी वापस आयेंगी, उनके भी प्रोग्राम बनेंगे।

प्रश्नकर्ता: लिस्ट के बारे में।
यह तो आप इन्तजार कीजिये लिस्ट का कि कौन-कौन एम.एल.ए. एम.पी. लड़ते हैं, नहीं लड़ते हैं। वह सब टाइम पर पता चल जायेगा।

प्रश्नकर्ता: चुनाव से पहले डी जी पी को हटाने के बारे में।
यह भी मैंने कहा कि यह इतने बौखलाये हुए हैं, इनके पास कहने को कुछ भी नहीं रहा है। ना उगलते बनता है, ना निगलते बनता है। वह इनकी दुर्गति हुई हुई है। अब यह चीफ सेक्रेट्री, डी जी पुलिस, एडीजी उन अधिकारियों पर बातें कर रहे हैं। कोई इनको पूछे कि पार्लियामेंट में जो कानून पास किया है, उस कानून को लागू करवाने की जिम्मेदारी चीफ सेक्रेट्री की नहीं होती है क्या? अगर मान लीजिये कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो गया है तो हम लोग उसका किसी तरह से पॉलिटिकल फायदा नहीं ले रहे हैं उस बात का। 2 अक्टूबर को हमने उसको लांच कर दिया। 20 अक्टूबर से वह प्रक्रिया शुरू हो रही है। अगर उसकी मोनिटरिंग चीफ सेक्रेट्री कर रहे हैं तो पक्ष-विपक्ष सबको मिलकर खुश होना चाहिये कि राजस्थान वह राज्य बन गया है देश के अंदर, बड़े राज्यों में प्रथम राज्य है राजस्थान, जिसने इतना बड़ा कदम उठाया है और 20 अक्टूबर से गरीबों या मिडल क्लास फैमिली को 2 रूपये किलो गेहूं मिलेगा। वह तो इन्तजार कर रहे हैं और आप इस प्रकार कमेंट कर रहे हो, लिखकर दे रहे हो। मैं समझता हूं जनता खुद इस बात का जवाब देगी।

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