Thursday, October 31, 2013

विशेष पिछड़ा वर्ग के कल्याण के प्रयासों से उगा उम्मीद का नया सूरज

जयपुर, 31 अक्टूबर। राज्य में विशेष पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने तथा इस वर्ग की क्षमताओं का समुचित उपयोग करने की दृष्टि से अनेक कार्यक्रम एवं योजनाएं क्रियान्वित की गई। आज विशेष पिछड़ा वर्ग के युवाओं, विद्यार्थियों के साथ इस वर्ग की बेहबूदी के लिए निरन्तर प्रयासों के परिणाम दिखाई देने लगे हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश के विकास में हर वर्ग के योगदान के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। उन्हीं की सोच और पिछड़ों को आगे लाने के प्रयासों के तहत राज्य में पहली बार विशेष पिछड़े वर्ग यथा गुर्जर, बंजारा, गाड़ियां-लुहार, रेबारी और गडरियां जाति के सम्पूर्ण विकास के लिए एक पैकेज का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
इस पैकेज के अन्तर्गत 41 आदर्श छात्रावास, 9 आवासीय विद्यालय, बयाना में महिला कॉलेज, नादौती (करौली) में महाविद्यालय स्वीकृत किये गये। छात्राओं को साईकिल एवं स्कूटी वितरण की गई। इस वर्ग के शैक्षणिक उन्नयन हेतु छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन योजनाएं प्रारम्भ की गई।
विशेष पिछड़ा वर्ग के छात्रों को पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा एक लाख 44 हजार से बढ़ाकर दो लाख की गई है। वर्ष 2013-14 में देव नारायण योजना के तहत 300 करोड़ का प्रावधान किया गया। इस योजना के तहत उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति नियम-2015 एवं अनुप्रति योजना नियम-2010 जारी किये गये।
विशेष पिछड़ा वर्ग के 36 हजार 764 विद्यार्थियों को उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति के रूप में 19.3 करोड़ की राशि वितरित की गई। प्रदेश में 38 विशेष पिछड़ा वर्ग के अभ्यार्थियों को अनुप्रति योजना का लाभ दिया गया।

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