जयपुर, 21 अक्टूबर। राज्य
सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले निर्धनतम लोगों के मकान का
सपना पूरा करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना का सपना
पूरा करने का संकल्पबद्ध प्रयास किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य आवास विहीन
बी.पी.एल. परिवारों को निःशुल्क पक्का आवास उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत हुडको से 3400 करोड़ रुपये का ऋण लेकर तीन वर्षो में इंदिरा आवास सहित 10
लाख आवास बनाकर गरीबो को देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का सपना है कि आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों
का अपना घर होना चाहिए जिससे वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके तथा अपने आप को
सामाजिक वातावरण से जुड़ा हुआ महसूस कर सके। श्री गहलोत ने इस योजना के प्रति
गरीबजन के अपार उत्साह को देखते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समक्ष यह
मांग रखी है कि देश में लोगों को राइट-टू-शैल्टर मिलना चाहिये।
राज्य में इस योजना के प्रथम चरण में एक लाख 41
हजार 67 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा
चुका है एवं एक लाख 27 हजार 514 आवासों का निर्माण
कार्य पूर्णतयाः अंतिम चरण में है। वही दूसरे चरण में 18
हजार 496 आवास पूर्ण एवं
शेष का कार्य अंतिम चरणों में है। इसके अतिरिक्त दो लाख 33
हजार 332 आवासों का निर्माण
कार्य इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत पूर्ण कर लिये गये है।
राज्य की स्वयं के स्त्रोतों पर आधारित अब तक की इस सबसे बड़ी योजना के
तृतीय चरण में लक्षित 2 लाख आवासों के निर्माण के लिये अनुदान सहायता की दर को बढ़ाकर 70
हजार रुपये प्रति ईकाई कर दिया गया है। आवास में टायलेट (शौचालय) के
निर्माण के लिये 9 हजार 100 रुपये का अतिरिक्त
अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गई है।
इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना
में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, मुक्त बंधुआ मजदूरो के परिवार, अल्पसंख्यकों एवं गैर-अनुसूचित जाति जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन
यापन करने वाले ग्रामीण परिवार, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सशस्त्र एवं अर्द्धसैनिक
बलों के जवानों की विधवाओं आदि को लाभान्वित किया जा रहा है। स्थाई
प्रतीक्षा सूची में ऎसे परिवार जिसके पास पक्का मकान नही है तथा पूर्व में किसी
आवासीय योजना में लाभान्वित नही हो, को भी पात्र माना जाता है।
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