जयपुर, 18 अक्टूबर । मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष
श्रीमती वसुंधरा राजे पर नौकरशाही को अपमानित करने के साथ-साथ गांव एवं गरीबों के लिये
राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही अनेक कल्याणकारी योजनाओं में अडंगा डालने का आरोप लगाया
है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चुनावी
आचार सहिंता लागू होने के पश्चात् नियमानुसार कोई नई योजना और नई घोषणा नहीं कर सकती, यह सर्वविदित है,
परन्तु पहले से चल रही
योजनाओं की मॉनीटरिंग करना मुख्य सचिव का दायित्व बनता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने कृत्य
से यह सिद्ध कर दिया है कि गांव, गरीब, किसान और मजदूरों से उनका कोई लेना देना नहीं हैं। उनका सिर्फ
और सिर्फ एक ही उद्देश्य येन-केन प्रकारेण सत्ता हासिल करना रह गया है।
श्री गहलोत ने कहा कि मैथ्यू जैसे
ईमानदार, कत्र्तव्यनिष्ठ एवं निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी पर अंगुली
उठाने से पहले श्रीमती राजे को यह देख लेना चाहिए था कि अपने पांच साल के कुशासन के
दौरान जिस अहम और घमंड के साथ उन्होंने तानाशाही
पूर्वक ब्यूरोक्रेसी के साथ कैसा दुव्र्यवहार किया वैसी मिसाल शायद देश के किसी अन्य राज्य में नहीं मिलेगी । सत्ता के गलियारों
में आज भी यह चर्चा आम है कि कलेक्टर कान्फ्रेंस में उनके द्वारा प्रताड़ित किये जाने
पर एक कलेक्टर को सीधे अस्पताल पहुंचना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि राजस्थान प्रशासनिक
सेवा संघ का वह सम्मेलन आज भी इस वर्ग के जेहन से निकला नहीं है जब उसके अध्यक्ष को
एक शेर सुनाने पर श्रीमती राजे द्वारा सरे आम बेइज्जत ही नहीं किया गया बल्कि प्रताड़ित
भी किया गया। ऎसे एक नहीं, बल्कि अनेक आई.ए.एस. अधिकारी हैं
जिनके आत्मसम्मान की परवाह किये बगैर श्रीमती राजे द्वारा रामबाग होटल पर जाकर अपने
चहेते ललित मोदी का हुकुम बजाने के लिए मजबूर किया गया । उसी मोदी ने एक अन्य आई.ए.एस.
को सरे आम सवाई मानसिंह स्टेडियम में जलील किया वहीं भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी
के साथ भी राजे की मोैजूदगी मेंं उसी मोदी ने बदतमीजी की सारी सीमाएं पार की , जो मीडिया मेंं सुर्खियां बनी ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान
के इतिहास मेंं यहां की ब्यूरोक्रेसी का देश में मान-सम्मान रहा है। सरकारें आती हैं, जाती हैं, किसी भी पार्टी की सरकार रही हो
मगर नौकरशाही के साथ राजे के कार्यकाल में जो घटनाएं हुई उसका उदाहरण किसी अन्य मुख्यमंत्री
के काल में नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि 1998
और 2008 में मैने जब शासन संभाला तब मुझे मुख्य सचिव के रूप में मिले, अधिकारियों को मैने कभी नहीं बदला बल्कि उन्हें साथ लेकर ही
काम को आगे बढ़ाया। वर्तमान शासनकाल मेंं ढेर सारी जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने
का जो रिकार्ड बना हैं, वो साढ़े छः लाख कर्मचारियों एवं
अधिकारियों के सहयोग से ही संभव हो पाया है,
उन्हें इस बात का संतोष
है।
श्री गहलोत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, निशुल्क दवा योजना ,
निशुल्क जांच, निशुल्क आवास,
पेंशन योजना के साथ अनेक
जन कल्याणकारी योजनाओं की मॉनीटरिंग किये जाने से श्रीमती राजे को तकलीफ क्यों पहुंची
यह समझ से परे है। असल में इसके पीछे उनकी
मानसिकता सिर्फ यही है कि दवाएं नहीं मिले,
गेहूं नहीं मिले, जांचे नहीं हों,
पेेंशन नहीं मिले, मकान नहीं मिले तो आम जन में प्रतिक्रिया हो, और वो इसका राजनीतिक लाभ उठा सके । जिनकी ऎसी घटिया सोच हो, उनको प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी बल्कि समय पर हिसाब मांगेगी कि ईमानदार और कत्र्तव्यनिष्ठ अधिकारियों
पर अंगुली उठा कर उन्होंने प्रदेश की जनता का कौन सा भला किया ?
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