जयपुर, 2 नवम्बर। वीर प्रसूता राजस्थान की धरती के कण-कण में
बिखरी शौर्य गाथाओं के साथ ही देश की सीमाओं की रखवाली करने की दिशा में भी
राजस्थान का देश की सैन्य व्यवस्था में अभूत पूर्व योगदान रहा है। राज्य ने उच्च
सैन्य अधिकारीयों से लेकर जांबाज जवानों ने सेना के तीनों अंगों में अपनी
महत्वपूर्ण सेवाएं दी है। जो आज भी बदस्तूर जारी है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर ही कारगिल
संग्राम के दौरान शहीद हुए प्रदेश के जांबाज सैनिकों के सम्मान में ‘‘कारगिल पैकेज’’ दिया गया, आज भी इसके तहत आतंकवाद, नक्सलवाद तथा सीमा पर देश की रक्षा करते हुए अपने
प्राणों को न्यौछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों को पैकेज का लाभ दिया जा रहा
है। देश में राजस्थान ऎसा पहला राज्य है जिसने शौर्य के सम्मान हेतु आगे बढ़कर
योजनाएं लागू की है।
राज्य सरकार ने जीवन पर्यन्त देश सेवा में समर्पित
रहने वाले भूत पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण
कार्यक्रमों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन किया है। भूतपूर्व सैनिकों के सम्मानजनक
पुनर्नियोजन के लिए 05 करोड़ रुपये की अंश पूंजी के साथ राजस्थान एक्स
सर्विसमेन कॉपोरेशन लि. का गठन किया है। राज्य में गैलेन्ट्री अवार्ड धारकों को
राज्य सरकार क्षरा देय पारितोषिक राशि में लगभग 10 गुना वृद्धि की गई है।
सूर्य नगरी जोधपुर में युद्ध विधवा छात्रावास एवं
पुर्नवास केन्द्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है, इस पर 6.45 करोड़ रुपये व्यय होगें। शहीदों एवं स्थाई विशेष
योग्यजन सैनिकों के 252 आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई, जिससे ये परिवार आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर
रहे है।
जयपुर में शहीदों के आश्रितों के वोकेशनल ट्रेनिंग
एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र आरम्भ हो चुका है। जहां शहीदों के आश्रित सूचना
क्रांति से जुड़ कर प्रदेश के विकास में भी अपना योगदान दे रहे हैं। राज्य में वर्ष
1999 से
पूर्व की युद्ध विधवाओं की पेंशन राशि को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह किया गया है। कोटा में पूर्व
सैनिकों की बच्चियों को प्रशिक्षण के लिए होस्टल की व्यवस्था, सीकर में सैनिकों के आश्रित छात्रों के लिए
छात्रावास तथा झुन्झुनूं में युद्ध विधवा छात्रावास बनाए गए है।
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